सनातन परंपरा में एकादशी तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मानी गई है। प्रत्येक चंद्र मास में दो एकादशी आती हैं — एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। इस प्रकार सामान्यतः एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं। अधिक मास पड़ने पर दो अतिरिक्त एकादशी — पद्मिनी एकादशी और परम एकादशी — आने से इनकी संख्या 26 हो जाती है।
एकादशी व्रत केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि मन, वाणी और इंद्रियों को संयमित करके भगवान विष्णु के स्मरण, नामजप और भक्ति में समय बिताने का पावन अवसर माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन श्रीहरि की पूजा, विष्णु सहस्रनाम पाठ, भजन-कीर्तन और एकादशी व्रत कथा का श्रवण अथवा पाठ करते हैं।
नीचे इस वर्ष तथा अगले वर्ष की सभी एकादशी तिथियाँ, वार और एकादशी तिथि के आरंभ एवं समाप्ति का समय दिया गया है। संबंधित एकादशी के नाम पर क्लिक करके उसकी व्रत कथा, महत्व और पूजा-विधि पढ़ सकते हैं।
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तिथियाँ और समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार गणना किए गए हैं; आपके शहर के पंचांग में समय या एक दिन का अंतर संभव है।
एकादशी व्रत के नियम
एकादशी व्रत की विधि और नियम अलग-अलग परिवारों तथा वैष्णव परंपराओं में कुछ भिन्न हो सकते हैं। सामान्य रूप से निम्न नियमों का पालन किया जाता है।
दशमी तिथि से संयम: एकादशी व्रत की तैयारी दशमी तिथि से ही आरंभ मानी जाती है। दशमी के दिन सात्त्विक और हल्का भोजन करें तथा लहसुन, प्याज, मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
प्रातः स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीहरि विष्णु का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु अथवा श्रीकृष्ण की पूजा करें। पुष्प, धूप, दीप, फल और तुलसी दल अर्पित करें तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार मंत्र-जप और पाठ करें।
अन्न का त्याग: परंपरागत रूप से एकादशी के दिन अन्न और विशेष रूप से चावल का सेवन नहीं किया जाता। व्रती अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार जलाहार अथवा फलाहार व्रत कर सकते हैं।
नामजप और पाठ: दिनभर भगवान का स्मरण करें। विशेष रूप से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा “ॐ नमो नारायणाय” का जप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है।
एकादशी व्रत कथा: जिस एकादशी का व्रत रखा जा रहा हो, उसकी व्रत कथा और माहात्म्य का श्रद्धापूर्वक पाठ अथवा श्रवण करना शुभ माना जाता है।
सात्त्विक आचरण: केवल भोजन का त्याग ही व्रत का उद्देश्य नहीं है। क्रोध, असत्य, निंदा और अनावश्यक विवाद से बचते हुए मन को भगवान के स्मरण में लगाने का प्रयास करें।
रात्रि में भजन-कीर्तन: सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार रात्रि में भगवान विष्णु के भजन, नाम-संकीर्तन अथवा जागरण किया जा सकता है।
द्वादशी को पारण: एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में उचित समय पर किया जाता है। सामान्यतः हरिवासर समाप्त होने के पश्चात पारण किया जाता है।
एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?
फलाहार करने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, आलू और सेंधा नमक आदि का सेवन कर सकते हैं। अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में व्रत के खाद्य नियम भिन्न हो सकते हैं।
यदि स्वास्थ्य के कारण पूर्ण उपवास संभव न हो तो अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार सरल फलाहार किया जा सकता है। व्रत का मूल भाव संयम, श्रद्धा और भगवान के स्मरण में मन लगाना है।
एकादशी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
एकादशी के दिन सामान्यतः गेहूँ, चावल, दालें और अन्य अन्न का सेवन नहीं किया जाता। अनेक परंपराओं में सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। भोजन संबंधी नियम अपने परिवार, गुरु अथवा संप्रदाय की परंपरा के अनुसार पालन करें।
एकादशी व्रत का पारण कब करें?
एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि में पारण करके किया जाता है। सामान्यतः सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण किया जाता है।
यदि सूर्योदय के समय द्वादशी का प्रारंभिक भाग हरिवासर में हो, तो हरिवासर समाप्त होने के बाद पारण किया जाता है। इसलिए संबंधित एकादशी के साथ दिए गए पारण समय को देखना उचित है।
स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?
कभी-कभी पंचांग के नियमों के कारण एकादशी व्रत लगातार दो दिनों में दिखाई देता है। ऐसी स्थिति में स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में व्रत की तिथि अलग हो सकती है।
इसका निर्णय केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख देखकर नहीं, बल्कि सूर्योदय के समय उपस्थित तिथि तथा दशमी, एकादशी और द्वादशी से संबंधित पंचांग नियमों के आधार पर किया जाता है। इसलिए अपने गुरु, संप्रदाय अथवा स्थानीय पंचांग की परंपरा का पालन करना उचित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
साल में कितनी एकादशी होती हैं?
सामान्यतः एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं। प्रत्येक चंद्र मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है। अधिक मास वाले वर्ष में पद्मिनी और परम एकादशी सहित कुल 26 एकादशी हो सकती हैं।
एकादशी किस भगवान को समर्पित है?
एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु तथा उनके श्रीराम और श्रीकृष्ण जैसे स्वरूपों का पूजन, नामजप और स्मरण किया जाता है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाए जाते?
सनातन परंपरा में एकादशी के दिन अन्न का त्याग करने का विधान माना गया है और विशेष रूप से चावल का सेवन नहीं किया जाता। व्रती अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा और कुट्टू आदि ग्रहण कर सकते हैं।
एकादशी का व्रत कौन रख सकता है?
श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार एकादशी व्रत कर सकता है। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, रोगी या नियमित दवा लेने वाले व्यक्ति अपने स्वास्थ्य और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फलाहार अथवा सरल व्रत कर सकते हैं।
क्या एकादशी में पानी पी सकते हैं?
हाँ। अधिकांश एकादशी व्रतों में अपनी क्षमता के अनुसार जल अथवा फलाहार ग्रहण किया जा सकता है। निर्जल उपवास अलग और अधिक कठिन व्रत-विधि है।
एकादशी के दिन कौन-सा मंत्र जपना चाहिए?
एकादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, ॐ नमो नारायणाय अथवा भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के नामों का जप किया जा सकता है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जाता है।
एकादशी व्रत कब खोला जाता है?
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है। सामान्यतः सूर्योदय के बाद और हरिवासर समाप्त होने के पश्चात उचित पारण समय में व्रत खोला जाता है।
अलग-अलग पंचांग में एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है?
तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से निर्धारित होती है तथा व्रत का निर्णय सूर्योदय के समय उपस्थित तिथि और अन्य पंचांग नियमों के आधार पर किया जाता है। स्थान और संप्रदाय के अनुसार एकादशी की तारीख में अंतर हो सकता है।
स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?
कुछ अवसरों पर पंचांग के नियमों के कारण स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में एकादशी व्रत अलग-अलग दिन रखा जाता है। वैष्णव परंपराओं में दशमी-विद्ध एकादशी और द्वादशी से संबंधित विशेष नियमों का पालन किया जाता है।
कौन-सी एकादशियाँ विशेष मानी जाती हैं?
सभी एकादशियाँ भगवान विष्णु की उपासना के लिए पवित्र मानी जाती हैं। निर्जला, देवशयनी, देवउठनी या प्रबोधिनी, मोक्षदा और वैकुण्ठ एकादशी विभिन्न परंपराओं में विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।