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पूर्णिमा व्रत की तिथियाँ

सनातन परंपरा में पूर्णिमा तिथि अत्यंत पवित्र मानी गई है। यह शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं और अंतिम तिथि होती है, जब चंद्रमा पूर्ण रूप से प्रकाशित दिखाई देता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु, भगवान सत्यनारायण और चंद्रदेव की पूजा, व्रत, कथा, स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है।

प्रत्येक चंद्र मास में एक पूर्णिमा आती है। इस प्रकार सामान्यतः एक वर्ष में 12 पूर्णिमा होती हैं। अधिक मास पड़ने पर एक अतिरिक्त पूर्णिमा आने से इनकी संख्या 13 हो सकती है।

नीचे इस वर्ष तथा अगले वर्ष की सभी पूर्णिमा तिथियाँ, वार और पूर्णिमा तिथि के आरंभ एवं समाप्ति का समय दिया गया है। जिस पूर्णिमा पर कोई प्रमुख व्रत या पर्व पड़ता है, उसका नाम भी संबंधित तिथि के साथ दिया गया है।

आज की तिथि, नक्षत्र, योग और अन्य पंचांग जानकारी के लिए आज का पंचांग देखें। अन्य प्रमुख व्रत और पर्वों की जानकारी व्रत और त्योहार पेज पर उपलब्ध है।

जनवरी 2026

  1. पौष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    संपन्न

फ़रवरी 2026

  1. माघ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    संपन्न

मार्च 2026

  1. फाल्गुन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    होलिका दहन · 2 मार्च, सोमवार

    संपन्न

अप्रैल 2026

  1. चैत्र पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    हनुमान जयंती · 2 अप्रैल, गुरुवार

    संपन्न

मई 2026

  1. बुद्ध पूर्णिमा

    वैशाख पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    संपन्न
  2. अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    संपन्न

जून 2026

  1. ज्येष्ठ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    संपन्न

जुलाई 2026

  1. गुरु पूर्णिमा

    आषाढ़ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    संपन्न

अगस्त 2026

  1. श्रावण पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    रक्षा बंधन · 28 अगस्त, शुक्रवार

    संपन्न

सितंबर 2026

  1. भाद्रपद पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    3 दिन में

अक्टूबर 2026

  1. शरद पूर्णिमा

    आश्विन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

नवंबर 2026

  1. कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली)

    कार्तिक पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

दिसंबर 2026

  1. दत्तात्रेय जयंती

    मार्गशीर्ष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जनवरी 2027

  1. पौष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

फ़रवरी 2027

  1. माघ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

मार्च 2027

  1. फाल्गुन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    होलिका दहन · 21 मार्च, रविवार

अप्रैल 2027

  1. हनुमान जयंती

    चैत्र पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

मई 2027

  1. बुद्ध पूर्णिमा

    वैशाख पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जून 2027

  1. ज्येष्ठ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जुलाई 2027

  1. गुरु पूर्णिमा

    आषाढ़ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अगस्त 2027

  1. श्रावण पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    रक्षा बंधन · 17 अगस्त, मंगलवार

सितंबर 2027

  1. भाद्रपद पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अक्टूबर 2027

  1. आश्विन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    शरद पूर्णिमा · 14 अक्टूबर, गुरुवार

नवंबर 2027

  1. कार्तिक पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) · 14 नवंबर, रविवार

दिसंबर 2027

  1. दत्तात्रेय जयंती

    मार्गशीर्ष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जनवरी 2028

  1. पौष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

फ़रवरी 2028

  1. माघ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

मार्च 2028

  1. होलिका दहन

    फाल्गुन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अप्रैल 2028

  1. हनुमान जयंती

    चैत्र पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

मई 2028

  1. बुद्ध पूर्णिमा

    वैशाख पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जून 2028

  1. ज्येष्ठ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जुलाई 2028

  1. गुरु पूर्णिमा

    आषाढ़ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अगस्त 2028

  1. श्रावण पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    रक्षा बंधन · 5 अगस्त, शनिवार

सितंबर 2028

  1. भाद्रपद पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अक्टूबर 2028

  1. शरद पूर्णिमा

    आश्विन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

नवंबर 2028

  1. कार्तिक पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) · 2 नवंबर, गुरुवार

दिसंबर 2028

  1. दत्तात्रेय जयंती

    मार्गशीर्ष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

  2. पौष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जनवरी 2029

  1. माघ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

फ़रवरी 2029

  1. होलिका दहन

    फाल्गुन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

मार्च 2029

  1. अधिक चैत्र पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अप्रैल 2029

  1. हनुमान जयंती

    चैत्र पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

मई 2029

  1. बुद्ध पूर्णिमा

    वैशाख पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जून 2029

  1. ज्येष्ठ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जुलाई 2029

  1. गुरु पूर्णिमा

    आषाढ़ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अगस्त 2029

  1. श्रावण पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    रक्षा बंधन · 24 अगस्त, शुक्रवार

सितंबर 2029

  1. भाद्रपद पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अक्टूबर 2029

  1. शरद पूर्णिमा

    आश्विन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

नवंबर 2029

  1. कार्तिक पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) · 21 नवंबर, बुधवार

दिसंबर 2029

  1. दत्तात्रेय जयंती

    मार्गशीर्ष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जनवरी 2030

  1. पौष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

फ़रवरी 2030

  1. माघ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

मार्च 2030

  1. होलिका दहन

    फाल्गुन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अप्रैल 2030

  1. चैत्र पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    हनुमान जयंती · 18 अप्रैल, गुरुवार

मई 2030

  1. बुद्ध पूर्णिमा

    वैशाख पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जून 2030

  1. ज्येष्ठ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

जुलाई 2030

  1. आषाढ़ पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    गुरु पूर्णिमा · 15 जुलाई, सोमवार

अगस्त 2030

  1. रक्षा बंधन

    श्रावण पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

सितंबर 2030

  1. भाद्रपद पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

अक्टूबर 2030

  1. आश्विन पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    शरद पूर्णिमा · 10 अक्टूबर, गुरुवार

नवंबर 2030

  1. कार्तिक पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

    कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) · 10 नवंबर, रविवार

दिसंबर 2030

  1. दत्तात्रेय जयंती

    मार्गशीर्ष पूर्णिमा

    पूर्णिमा तिथि आरंभ: समाप्त:

तिथियाँ और समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार गणना किए गए हैं; आपके शहर के पंचांग में समय या एक दिन का अंतर संभव है।

पूर्णिमा व्रत का महत्व

पूर्णिमा तिथि को धर्म, साधना और दान-पुण्य के लिए विशेष माना गया है। इस दिन अनेक श्रद्धालु भगवान विष्णु अथवा भगवान सत्यनारायण की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण अथवा पाठ करते हैं।

पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में दिखाई देता है, इसलिए चंद्र दर्शन और चंद्रदेव को अर्घ्य देने की भी परंपरा है। अलग-अलग पूर्णिमाओं का धार्मिक महत्व अलग हो सकता है, जैसे गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और माघ पूर्णिमा।

पूर्णिमा के दिन क्या करें?

प्रातः स्नान: सूर्योदय के समय अथवा प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो श्रद्धापूर्वक घर पर स्नान किया जा सकता है।

भगवान विष्णु की पूजा: भगवान श्रीहरि विष्णु अथवा भगवान सत्यनारायण की पूजा करें। पुष्प, धूप, दीप, फल और तुलसी दल अर्पित करें तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार मंत्र-जप करें।

सत्यनारायण व्रत कथा: पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा और व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण करना अनेक परिवारों में विशेष रूप से प्रचलित है।

दान-पुण्य: अन्न, वस्त्र, धन अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना पुण्यकारी माना जाता है।

चंद्र दर्शन: शाम अथवा रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन करें और अपनी परंपरा के अनुसार जल अथवा अर्घ्य अर्पित करें।

भजन और नामस्मरण: दिनभर भगवान का स्मरण, मंत्र-जप, भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ किया जा सकता है।

पूर्णिमा व्रत कैसे रखा जाता है?

पूर्णिमा व्रत की विधि परिवार और परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है। सामान्यतः प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु अथवा सत्यनारायण की पूजा की जाती है और व्रत का संकल्प लिया जाता है।

व्रती अपनी सामर्थ्य के अनुसार फलाहार, दुग्धाहार अथवा एक समय सात्त्विक भोजन कर सकते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरे दिन उपवास करके चंद्र दर्शन अथवा पूजा के पश्चात व्रत का पारण करते हैं।

व्रत का मूल भाव केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म में संयम रखते हुए भगवान के स्मरण और सात्त्विक आचरण में समय बिताना है।

पूर्णिमा के दिन क्या खा सकते हैं?

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, आलू, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक आदि का सेवन कर सकते हैं।

कुछ परिवारों में पूर्णिमा व्रत में एक समय सात्त्विक भोजन करने की परंपरा भी होती है। इसलिए अपने परिवार, गुरु अथवा संप्रदाय की परंपरा के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करें।

पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?

सनातन परंपरा में चंद्रदेव को मन, शीतलता और सौम्यता से जोड़ा गया है। पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा पूर्ण रूप से प्रकाशित दिखाई देता है, इसलिए अनेक श्रद्धालु चंद्र दर्शन करके जल अर्पित करते हैं और चंद्रदेव से शांति, सौम्यता और कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

पूर्णिमा की तिथि अलग-अलग क्यों दिखाई देती है?

हिंदू पंचांग की तिथियाँ अंग्रेजी कैलेंडर की मध्यरात्रि से नहीं बदलतीं। तिथि सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति के आधार पर निर्धारित होती है और एक तिथि किसी दिन के बीच में आरंभ अथवा समाप्त हो सकती है।

इसके अतिरिक्त कुछ व्रत और पर्व पूर्णिमा तिथि के विशेष काल — जैसे प्रदोष, अपराह्न या चंद्रोदय — पर आधारित होते हैं। इसलिए किसी विशेष पर्व की तारीख सामान्य पूर्णिमा व्रत की तारीख से अलग दिखाई दे सकती है।

प्रमुख पूर्णिमाएँ

माघ पूर्णिमा: माघ मास की पूर्णिमा को स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष माना जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा: वैशाख पूर्णिमा को भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रमुख प्रसंगों के कारण बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा: आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विशेष माना जाता है।

श्रावण पूर्णिमा: श्रावण मास की पूर्णिमा के आसपास रक्षा बंधन और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के पर्व मनाए जाते हैं।

शरद पूर्णिमा: आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। वैष्णव परंपराओं में इस तिथि का श्रीकृष्ण की महारास लीला से विशेष संबंध माना जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा: कार्तिक मास की पूर्णिमा अत्यंत पवित्र मानी जाती है और अनेक स्थानों पर इसे देव दीपावली से भी जोड़ा जाता है। इस दिन स्नान, दीपदान और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साल में कितनी पूर्णिमा होती हैं?
सामान्यतः एक वर्ष में 12 पूर्णिमा होती हैं, प्रत्येक चंद्र मास में एक। अधिक मास वाले वर्ष में एक अतिरिक्त पूर्णिमा आने से कुल 13 पूर्णिमा हो सकती हैं।
पूर्णिमा किस भगवान को समर्पित है?
पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और भगवान सत्यनारायण की पूजा विशेष रूप से की जाती है। अनेक श्रद्धालु इस दिन चंद्रदेव की भी पूजा और चंद्र दर्शन करते हैं।
पूर्णिमा का व्रत कैसे रखा जाता है?
प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु अथवा सत्यनारायण की पूजा और व्रत कथा की जाती है। व्रती अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार, एक समय सात्त्विक भोजन अथवा उपवास कर सकते हैं और शाम को चंद्र दर्शन कर सकते हैं।
पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा क्यों की जाती है?
भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा के लिए पूर्णिमा तिथि को अनेक परिवारों में विशेष शुभ माना जाता है। श्रद्धालु परिवार के कल्याण और भगवान विष्णु की कृपा की कामना से सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण करते हैं।
पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?
पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा पूर्ण रूप से प्रकाशित दिखाई देता है। सनातन परंपरा में चंद्रदेव को शीतलता और सौम्यता से जोड़ा गया है, इसलिए श्रद्धालु चंद्र दर्शन करके जल अथवा अर्घ्य अर्पित करते हैं।
पूर्णिमा तिथि और पूर्णिमा व्रत की तारीख अलग क्यों दिखाई देती है?
हिंदू तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से निर्धारित होती है और किसी दिन के बीच में आरंभ अथवा समाप्त हो सकती है। व्रत और पर्व का निर्णय सूर्योदय, चंद्रोदय या अन्य विशेष काल के नियमों के आधार पर किया जा सकता है, इसलिए तारीख में अंतर दिखाई दे सकता है।
पूर्णिमा के दिन क्या दान करना चाहिए?
पूर्णिमा के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। दान श्रद्धा और यथाशक्ति करना चाहिए।
पूर्णिमा के दिन क्या खा सकते हैं?
व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, आलू, कुट्टू, सिंघाड़ा और सेंधा नमक आदि ग्रहण कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में एक समय सात्त्विक भोजन भी किया जाता है।
कौन-सी पूर्णिमाएँ विशेष मानी जाती हैं?
गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा और श्रावण पूर्णिमा सहित कई पूर्णिमाएँ अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखती हैं।
क्या हर पूर्णिमा पर सत्यनारायण व्रत किया जा सकता है?
हाँ, अनेक श्रद्धालु प्रत्येक पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा करते हैं। परिवार और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार इसकी विधि में कुछ अंतर हो सकता है।

संबंधित: एकादशी व्रत की तिथियाँ