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श्री तुलसी पूजा के मंत्र
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श्री तुलसी पूजा के मंत्र

Shri Tulsi Puja Ke Mantra

सनातन परंपरा में तुलसी देवी को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की अत्यंत प्रिय माना गया है। उन्हें वृन्दा, वृन्दावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी और कृष्णजीवनी जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। तुलसी माता की सेवा, दर्शन, पूजन और उनके समीप दीप प्रज्वलित करना एक पवित्र धार्मिक आचरण माना गया है।

तुलसी पूजा में केवल जल अर्पित करना ही नहीं, बल्कि स्वच्छता, श्रद्धा, नियमितता और भगवान श्रीहरि का स्मरण भी महत्वपूर्ण है। तुलसी माता के सरल नाम मंत्र, गायत्री मंत्र, ध्यान मंत्र, स्तुति और प्रार्थना का पाठ दैनिक पूजा में किया जा सकता है।

सभी मंत्रों का एक साथ पाठ करना आवश्यक नहीं है। साधक अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक मुख्य मंत्र का जाप कर सकता है और पूजा के अलग-अलग चरणों में संबंधित प्रार्थनाओं का पाठ कर सकता है।

तुलसी पूजा की सरल विधि

  • प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • तुलसी के आसपास का स्थान साफ रखें और श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
  • सबसे पहले भगवान श्री गणेश, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और अपने इष्टदेव का स्मरण करें।
  • तुलसी के मूल में धीरे-धीरे स्वच्छ जल अर्पित करें। आवश्यकता से अधिक जल न डालें।
  • तुलसी के समीप सुरक्षित स्थान पर घी अथवा तेल का दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है।
  • तुलसी माता को रोली, अक्षत, पुष्प और अपनी श्रद्धानुसार नैवेद्य अर्पित करें।
  • तुलसी के सरल नाम मंत्र अथवा गायत्री मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें।
  • अंत में तुलसी माता और भगवान श्रीहरि से भक्ति, सद्बुद्धि और सात्त्विक जीवन की प्रार्थना करें।

ध्यान रखें: दीपक तुलसी के पत्तों और तने से उचित दूरी पर रखें। तुलसी की धार्मिक सेवा के साथ पौधे के स्वास्थ्य, मिट्टी, धूप और जल की मात्रा का भी ध्यान रखें।

श्री तुलसी माता के प्रमुख मंत्र

तुलसी जी को जल अर्पित करते समय का मंत्र

तुलसी के मूल में जल अर्पित करते समय इस प्रचलित प्रार्थना का पाठ किया जा सकता है।

महाप्रसादजननि सर्वसौभाग्यवर्धिनि।

आधिव्याधिहरे नित्यं तुलसि त्वां नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे महाप्रसाद की जननी, सभी प्रकार के सौभाग्य को बढ़ाने वाली और आधि-व्याधियों को दूर करने वाली तुलसी माता! आपको नित्य नमस्कार है।

तुलसी माता को स्नान कराते समय का मंत्र

विधिवत तुलसी पूजन में स्वच्छ जल से स्नान अर्पित करते समय इस मंत्र का पाठ किया जा सकता है।

नदीनदसमुद्भूतं पवित्रं निर्मलं जलम्।

स्नानार्थं तुलसी मातः प्रीत्यर्थं प्रतिगृह्यताम्॥

अर्थ: हे तुलसी माता! नदियों से प्राप्त यह पवित्र और निर्मल जल आपके स्नान के लिए अर्पित है। कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें।

तुलसी माता का ध्यान मंत्र

पूजा आरंभ करने से पहले तुलसी माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हुए इस मंत्र का पाठ किया जा सकता है।

ध्यायेच्च तुलसीं देवीं श्यामां कमललोचनाम्।

प्रसन्नपद्मकल्हारवरदां सुचतुर्भुजाम्॥

किरीटहारकेयूरकुण्डलादि-विभूषिताम्।

धवलां सुखसंयुक्तां पद्मासनविराजिताम्॥

अर्थ: कमल के समान नेत्रों वाली, प्रसन्न स्वरूपा, चार भुजाओं से युक्त, मुकुट, हार, बाजूबंद और कुण्डलों से सुशोभित तथा कमलासन पर विराजमान देवी तुलसी का ध्यान करना चाहिए।

तुलसी माता का प्रणाम मंत्र

देवैस्त्वं निर्मिता पूर्वम् अर्चिताऽसि मुनीश्वरैः।

नमो नमस्ते तुलसि पापं हर हरिप्रिये॥

अर्थ: हे तुलसी माता! प्राचीन काल से देवताओं और ऋषि-मुनियों द्वारा आपकी पूजा की गई है। भगवान श्रीहरि की प्रिय देवी! आपको बार-बार नमस्कार है। कृपा करके मेरे पापों और दोषों को दूर करें।

तुलसी माता का सरल नाम मंत्र

यह तुलसी माता का सरल मंत्र है। दैनिक पूजा, जल अर्पण अथवा तुलसी के दर्शन करते समय इसका जाप किया जा सकता है।

ॐ श्री तुलस्यै नमः॥

अर्थ: मैं देवी तुलसी को श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

तुलसी गायत्री मंत्र

इस मंत्र में भगवान विष्णु की प्रिय देवी तुलसी का ध्यान करके उनसे बुद्धि को धर्म और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करने की प्रार्थना की जाती है।

ॐ तुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि।

तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम देवी तुलसी को जानें और भगवान विष्णु की प्रिय देवी का ध्यान करें। देवी वृन्दा हमारी बुद्धि को शुभ, सात्त्विक और भक्तिपूर्ण मार्ग पर प्रेरित करें।

तुलसी माता की मुख्य स्तुति

तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे।

नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये॥

अर्थ: हे माता लक्ष्मी की प्रिय सखी, कल्याणमयी, पापों को दूर करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली देवी तुलसी! देवर्षि नारद द्वारा स्तुति की गई और भगवान नारायण के मन को प्रिय देवी! आपको नमस्कार है।

तुलसी माता की सुख-सौभाग्य प्रार्थना

मनःप्रसादजननि सुखसौभाग्यदायिनि।

आधिव्याधिहरे देवि तुलसि त्वां नमाम्यहम्॥

अर्थ: हे मन को प्रसन्नता प्रदान करने वाली, सुख और सौभाग्य देने वाली तथा आधि-व्याधियों को दूर करने वाली देवी तुलसी! मैं आपको श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

तुलसी माता के पवित्र स्वरूप की प्रार्थना

यन्मूले सर्वतीर्थानि यन्मध्ये सर्वदेवताः।

यदग्रे सर्ववेदाश्च तुलसि त्वां नमाम्यहम्॥

अर्थ: जिनके मूल में सभी तीर्थों, मध्य भाग में सभी देवताओं और अग्रभाग में सभी वेदों का निवास माना गया है, उन देवी तुलसी को मैं नमस्कार करता हूँ।

तुलसी माता का कल्याण मंत्र

नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे।

नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके॥

अर्थ: हे कल्याणमयी और भगवान विष्णु की प्रिय देवी तुलसी! आपको नमस्कार है। हे शुभ स्वरूपा, आध्यात्मिक मुक्ति और सम्पदा प्रदान करने वाली देवी! आपको बार-बार प्रणाम है।

तुलसी माता की रक्षा प्रार्थना

तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भ्योऽपि सर्वदा।

कीर्तितापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम्॥

अर्थ: देवी तुलसी सदैव सभी विपत्तियों से मेरी रक्षा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी माता का कीर्तन और स्मरण मनुष्य के जीवन को पवित्रता की ओर ले जाता है।

तुलसी माता के षोडश नाम

इस स्तोत्र में तुलसी माता के विभिन्न नामों और दिव्य स्वरूपों का स्मरण किया गया है।

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।

धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया॥

लक्ष्मीप्रियसखी देवी द्यौर्भूमिरचला चला।

षोडशैतानि नामानि तुलस्याः कीर्तयन्नरः॥

लभते सुतरां भक्तिम् अन्ते विष्णुपदं लभेत्।

तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया॥

अर्थ: इन श्लोकों में तुलसी माता को श्री, महालक्ष्मी, विद्या, यशस्विनी, धर्ममयी, माता लक्ष्मी की प्रिय सखी, पृथ्वीस्वरूपा, पद्मिनी और भगवान श्रीहरि की प्रिय देवी के रूप में स्मरण किया गया है। इसकी पारंपरिक फलश्रुति में उत्तम भक्ति और भगवान विष्णु के परम पद की प्राप्ति बताई गई है।

श्री तुलसी नामाष्टक

इस स्तुति में देवी तुलसी के आठ प्रसिद्ध नाम—वृन्दा, वृन्दावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी—लिए गए हैं।

वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नन्दिनी च तुलसी कृष्णजीवनी॥

एतन्नामाष्टकं चैव स्तोत्रं नामार्थसंयुतम्।

यः पठेत्तां च सम्पूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत्॥

अर्थ: वृन्दा, वृन्दावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी—ये देवी तुलसी के आठ पवित्र नाम हैं। अंतिम श्लोक इसकी पारंपरिक फलश्रुति है, जिसमें श्रद्धापूर्वक पूजन और पाठ का महान धार्मिक फल बताया गया है।

तुलसी माता के आठ नाम मंत्र

ॐ वृन्दायै नमः॥

ॐ वृन्दावन्यै नमः॥

ॐ विश्वपूजितायै नमः॥

ॐ विश्वपावन्यै नमः॥

ॐ पुष्पसारायै नमः॥

ॐ नन्दिन्यै नमः॥

ॐ तुलस्यै नमः॥

ॐ कृष्णजीवन्यै नमः॥

अर्थ: इन नाम मंत्रों के माध्यम से देवी तुलसी के आठ पवित्र स्वरूपों का स्मरण और नमन किया जाता है।

तुलसी के पत्ते तोड़ने का मंत्र

भगवान विष्णु अथवा श्रीकृष्ण की पूजा के लिए तुलसीदल लेते समय सबसे पहले तुलसी माता को प्रणाम करें और केवल आवश्यकता के अनुसार ही पत्ते चुनें।

तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिये।

केशवार्थं चिनोमि त्वां वरदा भव शोभने॥

अर्थ: हे अमृत से उत्पन्न और भगवान केशव की सदा प्रिय देवी तुलसी! मैं भगवान केशव की पूजा के लिए आपके पत्ते चुनता हूँ। हे कल्याणमयी देवी! मुझ पर कृपा करें।

तुलसीदल चयन का दूसरा प्रचलित मंत्र

मातस्तुलसि गोविन्दहृदयानन्दकारिणि।

नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे माता तुलसी! भगवान गोविन्द के हृदय को आनंद प्रदान करने वाली देवी! भगवान नारायण की पूजा के लिए मैं आपके पत्ते चुनता हूँ। आपको नमस्कार है।

तुलसी के पत्ते लेते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • तुलसी के पत्ते आवश्यकता के अनुसार ही लें और अनावश्यक रूप से पौधे को हानि न पहुँचाएँ।
  • पत्ते लेने से पहले तुलसी माता को प्रणाम करके अनुमति की प्रार्थना करें।
  • पत्तों को नाखून से काटने या शाखाओं को जोर से खींचने से बचें।
  • रात्रि में तुलसी के पत्ते न तोड़ना सामान्य धार्मिक आचार माना जाता है।
  • तुलसीदल चयन से संबंधित तिथि और दिन के नियम विभिन्न वैष्णव, पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं में अलग हो सकते हैं। अपनी कुल या गुरु परंपरा का पालन करें।
  • सूखी, रोगग्रस्त अथवा कमजोर तुलसी को बार-बार छूने या उसके पत्ते तोड़ने से बचें।

कौन-सा तुलसी मंत्र जपना चाहिए?

  • दैनिक सरल उपासना: ॐ श्री तुलस्यै नमः॥
  • बुद्धि और भक्ति की प्रार्थना: तुलसी गायत्री मंत्र।
  • पूजा आरंभ करने से पहले: तुलसी ध्यान मंत्र।
  • तुलसी माता को प्रणाम करते समय: देवैस्त्वं निर्मिता पूर्वम्…
  • जल अर्पित करते समय: महाप्रसादजननि सर्वसौभाग्यवर्धिनि…
  • तुलसी के दर्शन और प्रणाम में: यन्मूले सर्वतीर्थानि…
  • भगवान विष्णु की पूजा के लिए पत्ते लेते समय: तुलस्यमृतजन्मासि…
  • तुलसी माता के आठ नामों के स्मरण के लिए: तुलसी नामाष्टक।

सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। दैनिक पूजा के लिए सरल नाम मंत्र अथवा तुलसी गायत्री मंत्र में से किसी एक का नियमित जाप किया जा सकता है।

तुलसी पूजा का पारंपरिक महत्व

वैष्णव परंपरा में तुलसी देवी को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की प्रिय भक्त के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। भगवान श्रीहरि की पूजा में तुलसीदल अर्पित करने और तुलसी माता का स्मरण करने की प्राचीन परंपरा है।

  • भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति की प्रार्थना के लिए।
  • मन, वाणी और व्यवहार में सात्त्विकता लाने की प्रेरणा के लिए।
  • घर में नियमित पूजा और आध्यात्मिक अनुशासन बनाए रखने के लिए।
  • प्रकृति, पौधों और पर्यावरण के प्रति सम्मान विकसित करने के लिए।
  • परिवार के कल्याण और सद्भाव की धार्मिक प्रार्थना के लिए।

मंत्रों में वर्णित सुख, सौभाग्य, आरोग्य और अन्य फल धार्मिक आस्था तथा पारंपरिक फलश्रुति का हिस्सा हैं। इन्हें किसी निश्चित सांसारिक परिणाम अथवा चिकित्सा की गारंटी नहीं मानना चाहिए।

तुलसी पूजा में आवश्यक सावधानियाँ

  • तुलसी की पूजा श्रद्धा के साथ करें, लेकिन पौधे की वास्तविक देखभाल की उपेक्षा न करें।
  • तुलसी के गमले में आवश्यकता से अधिक जल न डालें।
  • दीपक को पौधे के पत्तों, सूखी टहनियों और पर्दों से सुरक्षित दूरी पर रखें।
  • मंत्रों का उच्चारण यथासंभव स्पष्ट और शांत गति से करें।
  • पूजा के नियमों को लेकर भय या भ्रम न रखें; अपनी पारिवारिक और गुरु परंपरा को प्राथमिकता दें।
  • मंत्र-जाप को किसी बीमारी के उपचार अथवा चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प न मानें।
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