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श्री लक्ष्मी माता के मंत्र
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श्री लक्ष्मी माता के मंत्र

Shri Lakshmi Mata Ke Mantra

माता लक्ष्मी को सुख, समृद्धि, सौभाग्य, पोषण और कल्याण की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वे भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं और श्री, महालक्ष्मी, कमला, पद्मा, हरिप्रिया, इन्दिरा तथा विष्णुप्रिया जैसे अनेक नामों से पूजी जाती हैं। कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी का स्वरूप पवित्रता, संतुलन और धर्मसम्मत समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

सनातन परंपरा में माता लक्ष्मी की उपासना केवल धन प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि सदाचार, संतोष, उदारता, पारिवारिक कल्याण और प्राप्त संसाधनों के उचित उपयोग की प्रार्थना के लिए भी की जाती है। दीपावली, शुक्रवार, पूर्णिमा और विशेष लक्ष्मी पूजन के अवसरों पर उनकी आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

इस पृष्ठ पर माता लक्ष्मी के सरल नाम मंत्र, बीज मंत्र, महालक्ष्मी मूल मंत्र, गायत्री मंत्र, श्रीसूक्त के वैदिक मंत्र, ध्यान मंत्र, महालक्ष्मी अष्टकम् के प्रमुख श्लोक और संक्षिप्त पूजा मंत्र अर्थ सहित दिए गए हैं। सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। साधक अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार किसी एक मुख्य मंत्र का नियमित जाप कर सकता है।

माता लक्ष्मी की पूजा और मंत्र जाप की सरल विधि

  • प्रातःकाल अथवा संध्याकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान और घर को यथासंभव स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखें।
  • भगवान श्री गणेश, भगवान विष्णु और अपने इष्टदेव का स्मरण करके पूजा आरंभ करें।
  • माता लक्ष्मी अथवा लक्ष्मी-नारायण के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
  • अपनी श्रद्धानुसार पुष्प, अक्षत, फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें।
  • नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी एक मुख्य मंत्र का चयन करें।
  • सामान्य उपासना में मंत्र का 11, 21 अथवा 108 बार जाप किया जा सकता है।
  • जाप पूर्ण होने पर माता से सद्बुद्धि, संतोष, धर्मसम्मत आजीविका और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

ध्यान रखें: लक्ष्मी पूजा को तत्काल धन-प्राप्ति या किसी निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी न मानें। मंत्र-जाप के साथ ईमानदार परिश्रम, उचित आर्थिक योजना, संयम, दान और सदाचार भी आवश्यक हैं।

श्री लक्ष्मी माता के प्रमुख मंत्र

माता लक्ष्मी का सरल नाम मंत्र

यह माता लक्ष्मी का सरल मंत्र है। दैनिक पूजा, दीप प्रज्वलित करते समय अथवा माता के नाम-जप में इसका पाठ किया जा सकता है।

ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥

अर्थ: सुख, समृद्धि और कल्याण प्रदान करने वाली माता महालक्ष्मी को मैं श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

श्री बीज से युक्त लक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

अर्थ: श्रीस्वरूपा और कल्याणमयी माता महालक्ष्मी को मैं नमस्कार करता हूँ। वे मुझे धर्मसम्मत समृद्धि और सद्बुद्धि प्रदान करें।

माता लक्ष्मी का बीज मंत्र

“श्रीं” माता लक्ष्मी का प्रसिद्ध बीजाक्षर माना जाता है। इसमें श्री, सौभाग्य, पोषण और समृद्धि के दिव्य भाव का स्मरण किया जाता है।

श्रीं॥

भावार्थ: इस बीजाक्षर के माध्यम से माता लक्ष्मी के श्री और कल्याण स्वरूप का ध्यान किया जाता है।

ध्यान रखें: सामान्य दैनिक पूजा में “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र अधिक सरल है। केवल बीज मंत्र की विशेष साधना, न्यास या बड़ी जाप-संख्या के लिए योग्य गुरु का मार्गदर्शन लेना उचित है।

श्री महालक्ष्मी मूल मंत्र

यह माता महालक्ष्मी का प्रसिद्ध मंत्र है। इसमें कमल में निवास करने वाली माता से प्रसन्न होकर कृपा प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है।

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।

श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

अर्थ: हे कमलस्वरूपा और कमल में निवास करने वाली माता महालक्ष्मी! प्रसन्न होकर हम पर कृपा कीजिए। आपको श्रद्धापूर्वक नमस्कार है।

इस मंत्र में बीजाक्षरों का प्रयोग हुआ है। सामान्य उपासना में इसका 11 अथवा 108 बार जाप किया जा सकता है। विशेष मंत्र-साधना या पुरश्चरण योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना उचित है।

माता लक्ष्मी गायत्री मंत्र

इस गायत्री मंत्र में माता लक्ष्मी को महादेवी और भगवान विष्णु की अर्धांगिनी के रूप में ध्यान करके उनसे बुद्धि को शुभ तथा धर्मपूर्ण मार्ग पर प्रेरित करने की प्रार्थना की जाती है।

ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।

तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम महादेवी के दिव्य स्वरूप को जानें और भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माता लक्ष्मी का ध्यान करें। माता लक्ष्मी हमारी बुद्धि को शुभ, संतुलित और धर्मसम्मत कर्मों की ओर प्रेरित करें।

श्रीसूक्त के प्रमुख लक्ष्मी मंत्र

श्रीसूक्त एक वैदिक स्तुति है, जिसमें श्री और लक्ष्मी के तेजस्वी, पोषणकारी तथा कल्याणमय स्वरूप का आवाहन किया गया है। नीचे श्रीसूक्त की कुछ प्रमुख ऋचाएँ दी गई हैं। वैदिक स्वर सहित संपूर्ण श्रीसूक्त का पाठ किसी वेदपाठी आचार्य से सीखना उचित है।

श्रीसूक्त का प्रथम मंत्र

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

अर्थ: हे जातवेद अर्थात अग्निदेव! स्वर्ण के समान प्रकाशमान, उज्ज्वल आभूषणों से सुशोभित और चन्द्रमा के समान सौम्य माता लक्ष्मी का हमारे जीवन में आवाहन कीजिए।

स्थिर लक्ष्मी की वैदिक प्रार्थना

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।

यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥

अर्थ: हे अग्निदेव! ऐसी स्थिर और कल्याणमयी माता लक्ष्मी का आवाहन कीजिए जिनकी कृपा से जीवन में आवश्यक संसाधन, पोषण, सहयोग और समृद्धि प्राप्त हो।

माता लक्ष्मी के आगमन की वैदिक प्रार्थना

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्।

श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवीर्जुषताम्॥

अर्थ: मैं तेज, ऐश्वर्य और गौरव से युक्त श्रीदेवी का आवाहन करता हूँ। माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर मेरे जीवन में धर्मसम्मत समृद्धि और कल्याण प्रदान करें।

माता लक्ष्मी के पोषण स्वरूप का मंत्र

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।

ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥

अर्थ: मैं सुगन्ध के समान शुभ प्रभाव फैलाने वाली, अजेय, नित्य पोषण प्रदान करने वाली और सभी प्राणियों की अधिष्ठात्री श्रीदेवी का आवाहन करता हूँ।

शुभ संकल्प और सत्य वाणी की प्रार्थना

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।

पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥

अर्थ: हमारे मन में शुभ संकल्प और वाणी में सत्यता हो। हमें अन्न, पोषण, जीविका और यश प्राप्त हो तथा श्री हमारे जीवन में निवास करें।

माता महालक्ष्मी की प्रसिद्ध स्तुति

यह महालक्ष्मी अष्टकम् का प्रथम श्लोक है। इसमें माता को महामाया, देवताओं द्वारा पूजित और शंख, चक्र तथा गदा धारण करने वाली देवी के रूप में नमन किया गया है।

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।

शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे महामाया, श्रीपीठ पर विराजमान और देवताओं द्वारा पूजित माता! शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी! आपको नमस्कार है।

महालक्ष्मी अष्टकम् के अन्य प्रमुख श्लोक

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि।

सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि।

सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।

मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: गरुड़ पर विराजमान, अधर्म का नाश करने वाली, सर्वज्ञ, शुभ वर प्रदान करने वाली, दुःखों को दूर करने वाली तथा सिद्धि, बुद्धि, भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली माता महालक्ष्मी को बार-बार नमस्कार है।

माता लक्ष्मी का ध्यान मंत्र

मुख्य मंत्र का जाप आरंभ करने से पहले माता लक्ष्मी के कमल पर विराजमान, प्रसन्न और अभय प्रदान करने वाले स्वरूप का ध्यान करते हुए इस श्लोक का पाठ किया जा सकता है।

वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदाम्।

हस्ताभ्यामभयप्रदां मणिगणैः नानाविधैर्भूषिताम्॥

भक्ताभीष्टफलप्रदां हरिहरब्रह्मादिभिः सेविताम्।

पार्श्वे पङ्कजशङ्खपद्मनिधिभिः युक्तां सदा शक्तिभिः॥

अर्थ: कमल के समान हाथों और प्रसन्न मुख वाली, सौभाग्य प्रदान करने वाली, अभय देने वाली, विविध रत्नों से सुशोभित और देवताओं द्वारा पूजित माता लक्ष्मी को मैं प्रणाम करता हूँ।

क्षीरसागरतनया लक्ष्मी स्तुति

लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराजतनयां श्रीरङ्गधामेश्वरीम्।

दासीभूतसमस्तदेववनितां लोकैकदीपाङ्कुराम्॥

श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभव-ब्रह्मेन्द्रगङ्गाधराम्।

त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥

अर्थ: क्षीरसागर से प्रकट हुईं, श्रीरंगधाम की अधिष्ठात्री, तीनों लोकों का पालन करने वाली, कमल पर विराजमान और भगवान मुकुन्द की प्रिय माता लक्ष्मी को मैं प्रणाम करता हूँ।

लक्ष्मी-नारायण संयुक्त मंत्र

यह माता लक्ष्मी और भगवान नारायण की संयुक्त उपासना का सरल मंत्र है। इसका जाप जीवन में धर्म, संतुलन, परस्पर सहयोग और पारिवारिक कल्याण की प्रार्थना करते हुए किया जा सकता है।

ॐ श्रीलक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः॥

अर्थ: माता लक्ष्मी और भगवान नारायण दोनों को मैं श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

अष्टलक्ष्मी के नाम मंत्र

अष्टलक्ष्मी माता लक्ष्मी के आठ पूजनीय स्वरूप माने जाते हैं। विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं में उनके नाम और क्रम में थोड़ा अंतर मिल सकता है। नीचे व्यापक रूप से प्रचलित आठ नाम दिए गए हैं।

ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः॥

ॐ धनलक्ष्म्यै नमः॥

ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः॥

ॐ गजलक्ष्म्यै नमः॥

ॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः॥

ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः॥

ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः॥

ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः॥

अर्थ: इन नाम मंत्रों के माध्यम से माता लक्ष्मी के आदि शक्ति, धन, अन्न-पोषण, राजसौभाग्य, सन्तान, साहस, विजय और विद्या प्रदान करने वाले स्वरूपों का स्मरण किया जाता है।

संक्षिप्त लक्ष्मी पूजा के समर्पण मंत्र

सामान्य घरेलू पूजा में प्रत्येक सामग्री अर्पित करते समय निम्न सरल मंत्र बोले जा सकते हैं। सभी उपचार उपलब्ध होना आवश्यक नहीं है; श्रद्धा के अनुसार जल, पुष्प, दीप और नैवेद्य से भी पूजा की जा सकती है।

ॐ महालक्ष्म्यै नमः आसनं समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः पाद्यं समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः अर्घ्यं समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः आचमनीयं समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः स्नानं समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः वस्त्रं समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः गन्धं समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः अक्षतान् समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः पुष्पाणि समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः धूपमाघ्रापयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः दीपं दर्शयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः नैवेद्यं निवेदयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः ताम्बूलं समर्पयामि॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः नमस्कारान् समर्पयामि॥

भावार्थ: हे माता महालक्ष्मी! मैं श्रद्धापूर्वक पूजा की यह सामग्री आपके चरणों में अर्पित करता हूँ। कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें।

कौन-सा लक्ष्मी मंत्र जपना चाहिए?

  • सरल दैनिक उपासना: ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
  • श्री बीज सहित सरल जाप: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
  • महालक्ष्मी की विशेष प्रार्थना: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये…
  • बुद्धि को शुभ मार्ग पर प्रेरित करने के लिए: लक्ष्मी गायत्री मंत्र।
  • वैदिक उपासना: हिरण्यवर्णां हरिणीं… अथवा संपूर्ण श्रीसूक्त।
  • माता की स्तुति: नमस्तेऽस्तु महामाये…
  • लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त पूजा: ॐ श्रीलक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः॥
  • माता के आठ स्वरूपों के स्मरण के लिए: अष्टलक्ष्मी नाम मंत्र।

सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। सामान्य दैनिक पूजा में “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” अथवा “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” में से किसी एक मंत्र का नियमित जाप किया जा सकता है।

लक्ष्मी मंत्र जाप का पारंपरिक महत्व

सनातन परंपरा में श्री का अर्थ केवल धन नहीं, बल्कि जीवन को पोषण और गरिमा प्रदान करने वाली सम्पूर्ण समृद्धि माना जाता है। इसमें अन्न, स्वास्थ्य, ज्ञान, सदाचार, परिवार, सहयोग, यश और धर्मसम्मत संसाधन भी सम्मिलित हैं।

  • सद्बुद्धि और धर्मसम्मत आजीविका की प्रार्थना के लिए।
  • घर में स्वच्छता, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की प्रेरणा के लिए।
  • प्राप्त संसाधनों का उचित और कल्याणकारी उपयोग करने के लिए।
  • संतोष, उदारता और दान की भावना विकसित करने के लिए।
  • परिवार में सहयोग, सौहार्द और आर्थिक अनुशासन की प्रार्थना के लिए।
  • आलस्य, अपव्यय, लोभ और अनुचित आर्थिक व्यवहार से बचने की प्रेरणा के लिए।

लक्ष्मी मंत्र का उद्देश्य लोभ या बिना परिश्रम धन प्राप्त करने की भावना को बढ़ाना नहीं, बल्कि साधक को कर्म, संतुलन, कृतज्ञता और धर्मपूर्ण समृद्धि की ओर प्रेरित करना है।

लक्ष्मी मंत्र जाप में आवश्यक सावधानियाँ

  • मंत्र का उच्चारण यथासंभव स्पष्ट और शांत गति से करें।
  • प्रतिदिन अलग-अलग मंत्र बदलने के बजाय किसी एक मुख्य मंत्र का नियमित जाप करें।
  • बीज मंत्रों और विशेष मंत्रओं को मनोरंजन या प्रदर्शन के रूप में न जपें।
  • लक्ष्मी मंत्र से तत्काल धनवर्षा, लॉटरी या निश्चित आर्थिक लाभ का दावा न करें।
  • आर्थिक समस्याओं में मंत्र-जाप के साथ बजट, बचत, ऋण-प्रबंधन और विशेषज्ञ सलाह को भी महत्व दें।
  • मंत्र-जाप को जुआ, सट्टा, अत्यधिक जोखिम या अनैतिक आय को उचित ठहराने का साधन न बनाएँ।
  • विशेष तांत्रिक साधना, न्यास, होम अथवा पुरश्चरण योग्य गुरु या आचार्य के मार्गदर्शन में करें।
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