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श्री कृष्ण जी के मंत्र
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श्री कृष्ण जी के मंत्र

Shri Krishna Ji Ke Mantra

वैष्णव परंपराओं में भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्णावतार अथवा स्वयं भगवान के रूप में पूजा जाता है। वे धर्म की स्थापना, भक्तों की रक्षा, निष्काम कर्म, प्रेम, भक्ति और ज्ञान का मार्ग दिखाने वाले जगद्गुरु माने जाते हैं। भक्त उन्हें वासुदेव, देवकीनन्दन, गोविन्द, गोपाल, दामोदर, माधव, मुरारी और गिरिधारी जैसे अनेक नामों से स्मरण करते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण की उपासना केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि मन को भगवान में लगाने, अपने कर्तव्यों को धर्मपूर्वक पूरा करने, अहंकार कम करने और प्रेमपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा के लिए भी की जाती है। जन्माष्टमी, एकादशी, गीता जयंती और वैष्णव पर्वों पर उनकी विशेष आराधना की जाती है।

इस पृष्ठ पर भगवान श्रीकृष्ण के सरल नाम मंत्र, द्वादशाक्षर वासुदेव मंत्र, गोपाल मंत्र, कृष्ण गायत्री मंत्र, महामंत्र, प्रणाम मंत्र, बालकृष्ण ध्यान और संक्षिप्त पूजा-समर्पण मंत्र अर्थ सहित दिए गए हैं। सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। साधक अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार किसी एक मुख्य मंत्र का नियमित जाप कर सकता है।

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और मंत्र जाप की सरल विधि

  • प्रातःकाल अथवा संध्याकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ करके भगवान श्री गणेश, अपने गुरु और इष्टदेव का स्मरण करें।
  • भगवान श्रीकृष्ण अथवा राधा-कृष्ण के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
  • अपनी श्रद्धानुसार पुष्प, तुलसीदल, फल, माखन-मिश्री अथवा अन्य सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें।
  • नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी एक मुख्य मंत्र का चयन करें।
  • सामान्य दैनिक उपासना में मंत्र का 11, 21 अथवा 108 बार जाप किया जा सकता है।
  • जाप के लिए तुलसी या स्फटिक की माला का प्रयोग किया जा सकता है।
  • जाप पूरा होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण से भक्ति, सद्बुद्धि और धर्मपूर्वक कर्म करने की प्रेरणा माँगें।

ध्यान रखें: तुलसीदल आवश्यकता के अनुसार ही लें और पौधे को हानि न पहुँचाएँ। मंत्र-जाप के साथ अपने कर्तव्यों, व्यवहार और कर्मों को भी सात्त्विक बनाना आवश्यक है।

भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख मंत्र

भगवान श्रीकृष्ण का सरल नाम मंत्र

यह भगवान श्रीकृष्ण का सरल मंत्र है। दैनिक पूजा, ध्यान, नाम-जप अथवा किसी कार्य का शुभ आरंभ करने से पहले इसका जाप किया जा सकता है।

ॐ श्रीकृष्णाय नमः॥

अर्थ: भगवान श्रीकृष्ण को मैं श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ। वे मेरे मन को भक्ति और धर्म के मार्ग पर प्रेरित करें।

भगवान श्रीकृष्ण के सरल नाम मंत्र

ॐ कृष्णाय नमः॥

ॐ गोविन्दाय नमः॥

ॐ गोपालाय नमः॥

ॐ दामोदराय नमः॥

ॐ देवकीनन्दनाय नमः॥

ॐ वासुदेवाय नमः॥

ॐ गिरिधारिणे नमः॥

ॐ मुरारये नमः॥

अर्थ: इन मंत्रों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के कृष्ण, गोविन्द, गोपाल, दामोदर, देवकीनन्दन, वासुदेव, गिरिधारी और मुरारी स्वरूपों का स्मरण करते हुए उन्हें नमस्कार किया जाता है।

श्रीकृष्ण का द्वादशाक्षर वासुदेव मंत्र

यह भगवान वासुदेव का प्रसिद्ध द्वादशाक्षर मंत्र है। सामान्य वैष्णव उपासना में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

अर्थ: सर्वव्यापक भगवान वासुदेव को मैं नमस्कार करता हूँ और उनकी शरण ग्रहण करता हूँ।

यह मंत्र दैनिक जप के लिए सरल और उपयुक्त है। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार इसका 11, 21 अथवा 108 बार जाप कर सकते हैं।

श्रीमद्भागवत का श्रीकृष्ण प्रणाम मंत्र

श्रीमद्भागवत में माता कुन्ती द्वारा की गई स्तुति का यह प्रसिद्ध श्लोक भगवान श्रीकृष्ण के वासुदेव-पुत्र, देवकीनन्दन, नन्दकुमार और गोविन्द स्वरूप को प्रणाम करता है।

कृष्णाय वासुदेवाय देवकीनन्दनाय च।

नन्दगोपकुमाराय गोविन्दाय नमो नमः॥

अर्थ: वसुदेव के पुत्र, माता देवकी को आनंद प्रदान करने वाले, नन्दबाबा के कुमार और गोविन्द भगवान श्रीकृष्ण को बार-बार नमस्कार है।

श्रीकृष्ण गायत्री मंत्र

इस गायत्री मंत्र में भगवान श्रीकृष्ण को वासुदेव और देवकीसुत के रूप में ध्यान करके उनसे बुद्धि को धर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करने की प्रार्थना की जाती है।

ॐ वासुदेवाय विद्महे देवकीसुताय धीमहि।

तन्नः कृष्णः प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम भगवान वासुदेव के दिव्य स्वरूप को जानें और देवकीनन्दन श्रीकृष्ण का ध्यान करें। भगवान श्रीकृष्ण हमारी बुद्धि को धर्म, प्रेम और शुभ कर्मों की ओर प्रेरित करें।

भगवान श्रीकृष्ण का गोपाल मंत्र

यह भगवान श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र है। इसमें उन्हें कृष्ण, गोविन्द और गोपीजनवल्लभ स्वरूप में स्मरण किया जाता है।

ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा॥

अर्थ: गोविन्द और भक्तों के परम प्रिय भगवान श्रीकृष्ण को मैं अपना मन और श्रद्धा समर्पित करता हूँ।

ध्यान रखें: इस मंत्र में बीजाक्षर का प्रयोग हुआ है। सामान्य भक्तिपूर्ण जाप किया जा सकता है, लेकिन विशेष साधना, न्यास, पुरश्चरण अथवा बड़ी जाप-संख्या योग्य वैष्णव गुरु या आचार्य के मार्गदर्शन में करना उचित है।

हरे कृष्ण महामंत्र

भगवान के पवित्र नामों के स्मरण और संकीर्तन के लिए हरे कृष्ण महामंत्र अत्यंत प्रसिद्ध है। गौड़ीय वैष्णव परंपरा में इसका निम्न क्रम व्यापक रूप से प्रचलित है।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

भावार्थ: हे भगवान की दिव्य शक्ति! हे भगवान कृष्ण और भगवान राम! कृपा करके मुझे अपनी प्रेममयी भक्ति और सेवा में लगाइए।

इस महामंत्र का नाम-जप, कीर्तन अथवा सामूहिक संकीर्तन किया जा सकता है। कलिसन्तरणोपनिषद् के उपलब्ध पाठ में राम-नाम वाली पंक्ति पहले और कृष्ण-नाम वाली पंक्ति उसके बाद आती है; विभिन्न वैष्णव परंपराओं में पाठ का क्रम अलग मिल सकता है।

क्लेश शांति के लिए श्रीकृष्ण प्रार्थना

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।

प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

अर्थ: भगवान कृष्ण, वासुदेव, हरि और परमात्मा को नमस्कार है। अपनी शरण में आए भक्तों के क्लेश दूर करने वाले गोविन्द को बार-बार प्रणाम है।

इस प्रार्थना का पाठ कठिन परिस्थितियों में मन को शांत करके भगवान की शरण और उचित मार्गदर्शन माँगने के भाव से किया जा सकता है।

भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध वंदना

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।

देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥

अर्थ: वसुदेव के पुत्र, कंस और चाणूर का मर्दन करने वाले, माता देवकी को परम आनंद प्रदान करने वाले तथा सम्पूर्ण संसार के गुरु भगवान श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

बालकृष्ण का ध्यान मंत्र

बालगोपाल अथवा बालमुकुन्द के स्वरूप का ध्यान करते हुए इस प्रसिद्ध श्लोक का पाठ किया जा सकता है।

करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम्।

वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि॥

अर्थ: जो अपने कमल के समान हाथ से कमल के समान चरण को कमल के समान मुख में रखे हुए वटपत्र पर शयन कर रहे हैं, उन बालमुकुन्द का मैं मन से स्मरण करता हूँ।

गोविन्द-दामोदर नाम-स्मरण

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव।

जिह्वे पिबस्वामृतमेतदेव गोविन्द दामोदर माधवेति॥

अर्थ: हे जिह्वा! श्रीकृष्ण, गोविन्द, हरि, मुरारी, नारायण, वासुदेव, दामोदर और माधव के मधुर नामरूपी अमृत का निरंतर पान करो।

भगवान माधव की कृपा प्रार्थना

मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिम्।

यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्दमाधवम्॥

अर्थ: जिनकी कृपा से मूक व्यक्ति बोलने में समर्थ हो जाता है और निर्बल व्यक्ति भी कठिन पर्वत पार कर सकता है, उन परमानन्दस्वरूप भगवान माधव को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्रीमद्भगवद्गीता का श्रीकृष्ण शरणागति श्लोक

श्रीमद्भगवद्गीता के अंतिम अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अहंकार, भय और फल की आसक्ति छोड़कर परमात्मा की शरण ग्रहण करने का उपदेश देते हैं।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।

अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥

सरल अर्थ: अपने कर्मों के अहंकार और फल की आसक्ति को छोड़कर मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों और बंधनों से मुक्त करूँगा; शोक मत करो।

इस श्लोक का अर्थ अपने सांसारिक कर्तव्यों से भागना नहीं, बल्कि कर्तव्य करते हुए अहंकार, भय और फल की आसक्ति को भगवान के चरणों में समर्पित करना समझना चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण की संक्षिप्त पूजा के समर्पण मंत्र

सामान्य घरेलू पूजा में अलग-अलग सामग्री अर्पित करते समय निम्न सरल मंत्र बोले जा सकते हैं। सभी उपचार उपलब्ध होना आवश्यक नहीं है। श्रद्धानुसार जल, पुष्प, तुलसीदल, दीप और नैवेद्य से भी पूजा की जा सकती है।

ॐ श्रीकृष्णाय नमः आवाहयामि स्थापयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः आसनं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः पाद्यं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः अर्घ्यं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः आचमनीयं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः स्नानं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः वस्त्रं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः गन्धं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः अक्षतान् समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः पुष्पाणि समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः तुलसीदलानि समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः धूपमाघ्रापयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः दीपं दर्शयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः नैवेद्यं निवेदयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः फलं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः ताम्बूलं समर्पयामि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः नमस्कारान् समर्पयामि॥

भावार्थ: हे भगवान श्रीकृष्ण! मैं श्रद्धापूर्वक पूजा की यह सामग्री आपके चरणों में अर्पित करता हूँ। कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें।

पूजा संबंधी सावधानी: बालगोपाल की धातु या उपयुक्त पत्थर की प्रतिमा को ही परंपरा और सामग्री के अनुसार स्नान कराएँ। चित्र, मिट्टी, लकड़ी अथवा रंग की हुई प्रतिमा पर जल, दूध, घी या शहद न डालें।

भगवान श्रीकृष्ण की संक्षिप्त पूजा विधि

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में श्रद्धानुसार आवाहन, आसन, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चन्दन, धूप, फल और ताम्बूल अर्पित किए जा सकते हैं। सभी सामग्री उपलब्ध होना आवश्यक नहीं है। सामान्य घरेलू पूजा में जल, पुष्प, तुलसीदल, दीप और सात्त्विक नैवेद्य से भी भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जा सकती है।

भगवान श्रीकृष्ण का आवाहन मंत्र

पूजा आरंभ करते समय भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करके इस मंत्र से उनका आवाहन करें।

ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्।

स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥

आगच्छ देवदेवेश तेजोराशे जगत्पते।

क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुरसत्तम॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः आवाहयामि॥

अर्थ: हे सम्पूर्ण संसार में व्याप्त, देवताओं के भी देव और जगत के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण! पधारिए और मेरे द्वारा श्रद्धापूर्वक की जा रही पूजा को स्वीकार कीजिए।

भगवान श्रीकृष्ण को आसन अर्पित करने का मंत्र

राजाधिराज राजेन्द्र बालकृष्ण महीपते।

रत्नसिंहासनं तुभ्यं दास्यामि स्वीकुरु प्रभो॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः आसनं समर्पयामि॥

अर्थ: हे राजाओं के भी राजा और सम्पूर्ण जगत के स्वामी बालकृष्ण! मैं आपके लिए यह दिव्य आसन अर्पित करता हूँ। कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें।

भगवान श्रीकृष्ण को अर्घ्य अर्पित करने का मंत्र

परिपूर्ण परानन्द नमो कृष्णाय वेधसे।

गृहाणार्घ्यं मया दत्तं कृष्ण विष्णो जनार्दन॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः अर्घ्यं समर्पयामि॥

अर्थ: हे परिपूर्ण, परमानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण, विष्णु और जनार्दन! मेरे द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित इस अर्घ्य को स्वीकार करें।

बालगोपाल को मधु स्नान कराने का मंत्र

पञ्चामृत स्नान की परंपरा में भगवान की उपयुक्त धातु अथवा पत्थर की प्रतिमा को शहद से स्नान कराते समय यह मंत्र बोला जा सकता है।

पुष्परेणुसमुद्भूतं सुस्वादु मधुरं मधु।

तेजःपुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः मधुस्नानं समर्पयामि॥

अर्थ: पुष्पों के पराग से उत्पन्न यह स्वादिष्ट, मधुर और पोषणकारी शहद आपके स्नान के लिए अर्पित है। कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें।

सावधानी: चित्र, मिट्टी, लकड़ी, प्लास्टर अथवा रंग की हुई प्रतिमा पर शहद या पञ्चामृत न डालें। ऐसी स्थिति में केवल मानसिक रूप से स्नान अर्पित करते हुए “ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः, मधुस्नानं समर्पयामि” बोलें।

भगवान श्रीकृष्ण को वस्त्र अर्पित करने का मंत्र

तप्तकाञ्चनसङ्काशं पीताम्बरमिदं हरे।

सङ्गृहाण जगन्नाथ बालकृष्ण नमोऽस्तु ते॥

ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः वस्त्रयुग्मं समर्पयामि॥

अर्थ: हे हरि, जगन्नाथ और बालकृष्ण! तपे हुए स्वर्ण के समान सुन्दर यह पीताम्बर आपके चरणों में अर्पित है। कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें।

भगवान श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत अर्पित करने का मंत्र

नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्।

यज्ञोपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पयामि॥

अर्थ: नौ तन्तुओं और तीन गुणों से युक्त यह पवित्र यज्ञोपवीत मैं आपको अर्पित करता हूँ। हे परमेश्वर! कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें।

भगवान श्रीकृष्ण को चन्दन अर्पित करने का मंत्र

श्रीखण्डचन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्।

विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः गन्धं समर्पयामि॥

अर्थ: हे देवताओं में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण! दिव्य, सुगन्धित और मनोहर चन्दन का यह लेप कृपापूर्वक स्वीकार करें।

भगवान श्रीकृष्ण को धूप अर्पित करने का मंत्र

वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः।

आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः धूपमाघ्रापयामि॥

अर्थ: वनस्पतियों के सुगन्धित रस से निर्मित और सभी देवताओं के लिए स्वीकार करने योग्य यह उत्तम धूप मैं आपको अर्पित करता हूँ।

भगवान श्रीकृष्ण को नारियल अथवा फल अर्पित करने का मंत्र

इदं फलं मया देव स्थापितं पुरतस्तव।

तेन मे सफलावाप्तिः भवेज्जन्मनि जन्मनि॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः फलं समर्पयामि॥

अर्थ: हे प्रभु! यह फल मैं आपके समक्ष अर्पित करता हूँ। आपकी कृपा से मेरे जीवन के धर्मसम्मत कर्म और शुभ संकल्प सफल हों।

भगवान श्रीकृष्ण को ताम्बूल अर्पित करने का मंत्र

पूगीफलं महादिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्।

एलादिचूर्णसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ श्रीकृष्णाय नमः ताम्बूलं समर्पयामि॥

अर्थ: सुपारी, पान के पत्ते और इलायची आदि सुगन्धित सामग्री से युक्त यह ताम्बूल मैं आपको अर्पित करता हूँ। कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें।

पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।

यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

अर्थ: हे जनार्दन! मेरी पूजा में मंत्र, विधि या भक्ति से संबंधित जो भी कमी रह गई हो, कृपा करके उसे क्षमा करें और इस पूजा को पूर्णता प्रदान करें।

कौन-सा श्रीकृष्ण मंत्र जपना चाहिए?

  • सरल दैनिक नाम-जप: ॐ श्रीकृष्णाय नमः॥
  • भगवान वासुदेव की शरण और भक्ति के लिए: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
  • भगवान के नामों का संकीर्तन: हरे कृष्ण महामंत्र।
  • बुद्धि को धर्म और भक्ति की ओर प्रेरित करने के लिए: श्रीकृष्ण गायत्री मंत्र।
  • भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों को प्रणाम करने के लिए: कृष्णाय वासुदेवाय देवकीनन्दनाय च…
  • कठिन परिस्थितियों में प्रार्थना: कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने…
  • बालगोपाल के ध्यान के लिए: करारविन्देन पदारविन्दम्…
  • गोपाल मंत्र की विशेष साधना: ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा॥

सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। सामान्य दैनिक उपासना में “ॐ श्रीकृष्णाय नमः”, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा हरे कृष्ण महामंत्र में से किसी एक का नियमित जाप किया जा सकता है।

श्रीकृष्ण मंत्र जाप का पारंपरिक महत्व

भगवान श्रीकृष्ण की उपासना प्रेम, भक्ति, ज्ञान, निष्काम कर्म, धर्म और जीवन के संतुलन की प्रेरणा देती है। श्रीमद्भगवद्गीता में उन्होंने मनुष्य को अपने कर्तव्य करते हुए फल की आसक्ति छोड़ने और परमात्मा की शरण ग्रहण करने का मार्ग बताया है।

  • भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति बढ़ाने की प्रार्थना के लिए।
  • मन की चंचलता और निराशा के बीच आध्यात्मिक स्थिरता की प्रेरणा के लिए।
  • अपने कर्तव्यों को धर्म और ईमानदारी से पूरा करने के लिए।
  • अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और अत्यधिक आसक्ति कम करने की प्रेरणा के लिए।
  • परिवार और समाज में प्रेमपूर्ण तथा धर्मसम्मत व्यवहार के लिए।
  • सुख और दुःख दोनों परिस्थितियों में भगवान का स्मरण बनाए रखने के लिए।

मंत्र-जाप का उद्देश्य केवल सांसारिक लाभ प्राप्त करना नहीं, बल्कि भगवान के नाम में मन लगाना और अपने विचार, व्यवहार तथा कर्मों को अधिक सात्त्विक बनाना भी है।

श्रीकृष्ण मंत्र जाप में आवश्यक सावधानियाँ

  • मंत्र का उच्चारण यथासंभव स्पष्ट और शांत गति से करें।
  • प्रतिदिन अलग-अलग मंत्र बदलने के बजाय किसी एक मुख्य मंत्र का नियमित जाप करें।
  • मंत्र-जाप को किसी व्यक्ति को आकर्षित, नियंत्रित या प्रभावित करने का माध्यम न बनाएँ।
  • बीज मंत्र और विशेष गोपाल मंत्र-साधना में परंपरा तथा गुरु-निर्देश का सम्मान करें।
  • मंत्रों से किसी निश्चित सांसारिक परिणाम अथवा चमत्कार का दावा न करें।
  • पारिवारिक, स्वास्थ्य, आर्थिक या कानूनी समस्याओं में केवल मंत्र-जाप पर निर्भर न रहें। आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ सहायता लें।
  • भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ सत्य, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा और सात्त्विक आचरण अपनाएँ।
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