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श्री चन्द्र देव जी के मंत्र
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श्री चन्द्र देव जी के मंत्र

Shri Chandr Dev Ji Ke Mantra

सनातन परंपरा में चन्द्रदेव को सोम, शशि, शशाङ्क, इन्दु, निशाकर और सुधाकर जैसे अनेक नामों से स्मरण किया जाता है। वे नवग्रहों में एक प्रमुख ग्रहदेव माने जाते हैं और वैदिक साहित्य में सोम का विशेष स्थान है। चन्द्रमा शीतलता, सौम्यता, काल-गणना, औषधियों और रात्रि के प्रकाश से भी जुड़ा हुआ है।

ज्योतिष परंपरा में चन्द्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिरता से संबंधित ग्रह माना जाता है। फिर भी चन्द्र मंत्रों का जाप केवल जन्मकुण्डली के किसी दोष या सांसारिक फल के लिए ही नहीं, बल्कि ईश्वर-स्मरण, मन की एकाग्रता, शांति और सात्त्विक जीवन की प्रार्थना के रूप में भी किया जा सकता है।

इस पृष्ठ पर चन्द्रदेव का सरल नाम मंत्र, बीज मंत्र, वैदिक मंत्र, पौराणिक प्रणाम मंत्र, गायत्री मंत्र और संक्षिप्त अर्घ्य-विधि अर्थ सहित दी गई है। सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। साधक अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार किसी एक मुख्य मंत्र का नियमित जाप कर सकता है।

चन्द्र मंत्र जाप की सरल विधि

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत स्थान पर बैठें।
  • भगवान श्री गणेश, अपने गुरु और इष्टदेव का स्मरण करें।
  • चन्द्रदेव के चित्र अथवा चन्द्रमा का ध्यान करके दीपक और धूप प्रज्वलित की जा सकती है।
  • अपनी श्रद्धानुसार सफेद पुष्प, अक्षत और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें।
  • नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी एक मुख्य मंत्र का चयन करें।
  • सामान्य भक्तिपूर्ण उपासना में 11, 21 अथवा 108 बार जाप किया जा सकता है।
  • सोमवार, पूर्णिमा अथवा चन्द्र दर्शन के अवसर पर विशेष पूजा की जा सकती है, लेकिन मंत्र का स्मरण अन्य दिनों में भी किया जा सकता है।
  • जाप पूर्ण होने पर शांत मन, सद्बुद्धि और संतुलित भावनाओं की प्रार्थना करें।

ध्यान रखें: चन्द्र मंत्र का जाप केवल रात्रि में ही करना अनिवार्य नहीं है। विभिन्न पूजा और ज्योतिष परंपराओं में समय तथा विधि अलग हो सकती है। विशेष ग्रह-शांति अनुष्ठान अपनी परंपरा या योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में करना उचित है।

श्री चन्द्रदेव के प्रमुख मंत्र

चन्द्रदेव का सरल नाम मंत्र

यह चन्द्रदेव के सरल नाम-स्मरण के लिए उपयुक्त मंत्र है। सामान्य दैनिक पूजा में इसका जाप किया जा सकता है।

ॐ सोम सोमाय नमः॥

अर्थ: शीतल, सौम्य और कल्याणकारी स्वरूप वाले सोमदेव को मैं श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

चन्द्रदेव का प्रचलित नाम मंत्र

ॐ सों सोमाय नमः॥

भावार्थ: सोमस्वरूप चन्द्रदेव को श्रद्धापूर्वक प्रणाम है।

चन्द्र बीज मंत्र

यह चन्द्रदेव का प्रसिद्ध बीज मंत्र है। चन्द्राष्टोत्तरशतनामावली के उपलब्ध पाठ में इसका रूप “ॐ श्राँ श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः” मिलता है।

ॐ श्राँ श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः॥

भावार्थ: चन्द्रदेव के शीतल, सौम्य और प्रकाशमय स्वरूप का ध्यान करते हुए उन्हें प्रणाम किया जाता है।

कुछ परंपराओं में अंतिम पद “चन्द्रमसे नमः” भी मिलता है। दोनों पाठ प्रचलित हैं। विशेष बीज साधना के लिए अपने गुरु अथवा आचार्य से प्राप्त पाठ का अनुसरण करना उचित है।

चन्द्रदेव का वैदिक मंत्र

यह यजुर्वेद की वाजसनेयी संहिता में प्राप्त मंत्र है और नवग्रह पूजा-पद्धतियों में सोम अथवा चन्द्र के आवाहन से भी जुड़ा हुआ मिलता है। पुराने page में इसी मंत्र का पाठ OCR त्रुटियों के कारण बहुत बिगड़ गया था।

इमं देवा असपत्नं सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय।

महते जानराज्याय इन्द्रस्येन्द्रियाय।

इमममुममुष्य पुत्रम् अमुष्याः पुत्रमस्यै विशे॥

एष वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा॥

सरल भावार्थ: देवगण इस यजमान को विरोधियों से रहित कर महान सामर्थ्य, श्रेष्ठता और नेतृत्व प्रदान करें। सोम हमारे लिए राजस्वरूप और पूजनीय हों।

स्रोत: वाजसनेयी संहिता में इस मंत्र के पाठ मिलते हैं। वैदिक स्वर सहित शुद्ध उच्चारण किसी वेदपाठी आचार्य से सीखना उचित है।

चन्द्रदेव का पौराणिक प्रणाम मंत्र

यह चन्द्रदेव का अत्यंत प्रसिद्ध प्रणाम मंत्र है। इसमें उनके श्वेत, शीतल स्वरूप और भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान होने का स्मरण किया जाता है।

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।

नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

अर्थ: जिनकी आभा दही, शंख और हिम के समान श्वेत है, जो क्षीरसागर से उत्पन्न हुए माने जाते हैं और भगवान शिव के मुकुट के भूषण हैं, उन शशिधर सोमदेव को मैं प्रणाम करता हूँ।

चन्द्र गायत्री मंत्र

इस गायत्री मंत्र में चन्द्रदेव के अमृतमय और कलाओं से युक्त स्वरूप का ध्यान करके उनसे बुद्धि को शुभ दिशा में प्रेरित करने की प्रार्थना की जाती है।

ॐ अमृताङ्गाय विद्महे कलारूपाय धीमहि।

तन्नः सोमः प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम अमृतमय स्वरूप वाले चन्द्रदेव को जानें और कलाओं से युक्त सोम का ध्यान करें। वे हमारी बुद्धि को शुभ और संतुलित विचारों की ओर प्रेरित करें।

चन्द्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र

पूर्णिमा, सोमवार अथवा विशेष चन्द्र पूजा में श्रद्धानुसार चन्द्रदेव को जल से अर्घ्य अर्पित करते हुए उनके पौराणिक प्रणाम मंत्र का पाठ किया जा सकता है।

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।

नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

चन्द्रदेव को अर्घ्य अर्पित करने की सरल विधि

  • चन्द्र दर्शन होने पर स्वच्छ स्थान पर खड़े हों।
  • स्वच्छ पात्र में जल लें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उसमें अक्षत या पुष्प जोड़े जा सकते हैं।
  • चन्द्रदेव का ध्यान करके ऊपर दिया गया प्रणाम मंत्र अथवा “ॐ सोम सोमाय नमः” बोलें।
  • श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
  • अर्घ्य देने के बाद हाथ जोड़कर शांत मन और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
  • ऐसे स्थान पर जल न डालें जहाँ फिसलन या किसी व्यक्ति को असुविधा हो।

चन्द्रदेव के कुछ सरल नाम मंत्र

ॐ चन्द्राय नमः॥

ॐ सोमाय नमः॥

ॐ शशधराय नमः॥

ॐ निशाकराय नमः॥

ॐ सुधाकराय नमः॥

अर्थ: इन मंत्रों के माध्यम से चन्द्रदेव के चन्द्र, सोम, शशधर, निशाकर और सुधाकर स्वरूपों का स्मरण करते हुए उन्हें नमस्कार किया जाता है।

कौन-सा चन्द्र मंत्र जपना चाहिए?

  • सरल दैनिक उपासना: ॐ सोम सोमाय नमः॥
  • सरल नाम-जप: ॐ चन्द्राय नमः॥
  • पौराणिक प्रार्थना: दधिशङ्खतुषाराभं…
  • बुद्धि को शुभ दिशा में प्रेरित करने की प्रार्थना: चन्द्र गायत्री मंत्र।
  • वैदिक पूजा: इमं देवा असपत्नं सुवध्वम्…
  • विशेष बीज साधना: ॐ श्राँ श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः॥

सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। सामान्य दैनिक उपासना में “ॐ सोम सोमाय नमः” अथवा “ॐ चन्द्राय नमः” में से किसी एक मंत्र का नियमित जाप किया जा सकता है।

चन्द्र मंत्र जाप का पारंपरिक महत्व

धार्मिक और ज्योतिष परंपराओं में चन्द्रदेव को शीतलता, सौम्यता, मन, भावनाओं और पोषण से जोड़ा जाता है। चन्द्र मंत्र का जाप साधक के लिए शांत मन, संयम और ईश्वर-स्मरण की साधना बन सकता है।

  • मन को शांत और एकाग्र करने की प्रार्थना के लिए।
  • भावनाओं में संतुलन और संयम विकसित करने की प्रेरणा के लिए।
  • भगवान शिव के शशिधर स्वरूप का स्मरण करने के लिए।
  • पूर्णिमा और सोमवार की पूजा में चन्द्रदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए।
  • ज्योतिषीय परंपरा में चन्द्र ग्रह की शांति के लिए की जाने वाली उपासना के एक अंग के रूप में।

जन्मकुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति का विश्लेषण ज्योतिष की एक अलग पद्धति है। केवल किसी सामान्य वेबसाइट की जानकारी के आधार पर ग्रह-दोष या जीवन की घटनाओं के निश्चित निष्कर्ष नहीं निकालने चाहिए।

चन्द्र मंत्र जाप में आवश्यक सावधानियाँ

  • मंत्र का उच्चारण यथासंभव स्पष्ट और शांत गति से करें।
  • बीज मंत्रों की विशेष साधना अपने गुरु या आचार्य के मार्गदर्शन में करें।
  • केवल जन्मकुण्डली में चन्द्रमा “कमजोर” होने की सामान्य धारणा के आधार पर भय न रखें।
  • मंत्र-जाप से मानसिक रोग, अनिद्रा या चिंता के निश्चित उपचार का दावा न करें।
  • लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता या नींद की गंभीर समस्या में चिकित्सकीय अथवा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लें।
  • ज्योतिषीय उपायों को चिकित्सा, आर्थिक निर्णय या अन्य आवश्यक व्यावहारिक कदमों का विकल्प न मानें।
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