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श्री गुरु देव जी के मंत्र

श्री गुरु देव जी के मंत्र

सनातन परंपरा में बृहस्पति देव को देवताओं के गुरु अर्थात देवगुरु के रूप में सम्मानित किया जाता है। उन्हें गुरु, बृहस्पति, आङ्गिरस, जीव और वाचस्पति जैसे नामों से भी स्मरण किया जाता है। वैदिक साहित्य में बृहस्पति ज्ञान, प्रार्थना, बुद्धि, वाणी और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से संबंधित देवता हैं।

ज्योतिष परंपरा में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, गुरु, शिक्षा, विवेक, सन्तान, सम्मान और जीवन में विस्तार से संबंधित ग्रह माना जाता है। फिर भी बृहस्पति मंत्रों का जाप केवल जन्मकुण्डली में किसी ग्रह-दोष के निवारण के लिए ही नहीं, बल्कि ज्ञान, सद्बुद्धि, धर्म और उचित मार्गदर्शन की प्रार्थना के रूप में भी किया जा सकता है।

इस पृष्ठ पर देवगुरु बृहस्पति का सरल नाम मंत्र, मूल मंत्र, बीज मंत्र, वैदिक मंत्र, पौराणिक प्रणाम मंत्र, गायत्री मंत्र और सरल पूजा-विधि अर्थ सहित दी गई है। सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। सामान्य साधक अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार किसी एक मुख्य मंत्र का नियमित जाप कर सकता है।

बृहस्पति मंत्र जाप की सरल विधि

  • प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत स्थान पर बैठें।
  • भगवान श्री गणेश, अपने गुरु और इष्टदेव का स्मरण करके पूजा आरंभ करें।
  • देवगुरु बृहस्पति अथवा नवग्रहों का ध्यान करके दीपक और धूप प्रज्वलित की जा सकती है।
  • अपनी श्रद्धानुसार पीले पुष्प, अक्षत और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें।
  • नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी एक मुख्य मंत्र का चयन करें।
  • सामान्य भक्तिपूर्ण उपासना में मंत्र का 11, 21 अथवा 108 बार जाप किया जा सकता है।
  • गुरुवार को बृहस्पति देव की विशेष पूजा की जा सकती है, लेकिन सरल नाम-जप अन्य दिनों में भी किया जा सकता है।
  • जाप पूर्ण होने पर ज्ञान, विवेक, विनम्रता और धर्मपूर्ण जीवन की प्रार्थना करें।

ध्यान रखें: विशेष ग्रह-शांति अनुष्ठान, निश्चित बड़ी जाप-संख्या, हवन, न्यास अथवा पुरश्चरण अपनी परंपरा या योग्य गुरु एवं आचार्य के मार्गदर्शन में करना उचित है।

श्री बृहस्पति देव के प्रमुख मंत्र

बृहस्पति देव का सरल नाम मंत्र

यह देवगुरु बृहस्पति का सबसे सरल नाम मंत्र है। दैनिक पूजा और नवग्रह स्मरण में इसका जाप किया जा सकता है।

ॐ बृहस्पतये नमः॥

अर्थ: देवताओं के गुरु, ज्ञान और विवेक के स्वरूप बृहस्पति देव को मैं श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

बृहस्पति मूल मंत्र

यह बृहस्पति देव का प्रसिद्ध लघु मंत्र है। तांत्रोक्त नवग्रह मंत्र-जप परंपरा में भी इसका पाठ मिलता है।

ॐ बृं बृहस्पतये नमः॥

भावार्थ: ज्ञान और सद्बुद्धि प्रदान करने वाले देवगुरु बृहस्पति को श्रद्धापूर्वक नमस्कार है।

बृहस्पति बीज मंत्र

यह देवगुरु बृहस्पति का व्यापक रूप से प्रचलित बीज मंत्र है। इसमें बृहस्पति के बीजाक्षरों के साथ गुरु स्वरूप को नमन किया जाता है।

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥

भावार्थ: ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करने वाले गुरु बृहस्पति को मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ।

ध्यान रखें: सामान्य दैनिक उपासना में “ॐ बृहस्पतये नमः” अथवा “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” अधिक सरल हैं। विशेष बीज मंत्र-साधना गुरु के मार्गदर्शन में करना उचित है।

बृहस्पति देव का वैदिक मंत्र

यह बृहस्पति देव की प्रसिद्ध वैदिक ऋचा है। इसमें बृहस्पति के तेज, बुद्धि और दिव्य सामर्थ्य का स्मरण करते हुए उनसे कल्याणकारी सम्पदा की प्रार्थना की जाती है।

बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।

यद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्॥

सरल अर्थ: हे बृहस्पति! आपका महान तेज और बुद्धि लोगों के बीच प्रकाशित होती है। उस दिव्य सामर्थ्य से हमारे जीवन में कल्याणकारी ज्ञान, शक्ति और समृद्धि स्थापित करें।

स्रोत: यह वैदिक मंत्र ऋग्वेद में प्राप्त होता है और वाजसनेयी संहिता में भी इसका पाठ मिलता है। वैदिक स्वर सहित शुद्ध उच्चारण किसी वेदपाठी आचार्य से सीखना उचित है।

बृहस्पति देव का पौराणिक प्रणाम मंत्र

यह देवगुरु बृहस्पति का प्रसिद्ध पौराणिक प्रणाम मंत्र है। इसमें उन्हें देवताओं और ऋषियों के गुरु, स्वर्ण के समान तेजस्वी तथा बुद्धि के स्वरूप के रूप में नमन किया जाता है।

देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।

बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥

अर्थ: देवताओं और ऋषियों के गुरु, स्वर्ण के समान तेजस्वी, बुद्धि के स्वरूप और तीनों लोकों में पूजनीय बृहस्पति देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

बृहस्पति गायत्री मंत्र

इस गायत्री मंत्र में देवगुरु बृहस्पति को आङ्गिरस स्वरूप में ध्यान करके उनसे बुद्धि को ज्ञान और धर्म के मार्ग पर प्रेरित करने की प्रार्थना की जाती है।

ॐ आङ्गिरसाय विद्महे दण्डायुधाय धीमहि।

तन्नो जीवः प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम आङ्गिरस स्वरूप देवगुरु को जानें और दण्ड धारण करने वाले उनके दिव्य स्वरूप का ध्यान करें। वे जीव अर्थात बृहस्पति हमारी बुद्धि को शुभ, ज्ञानपूर्ण और धर्मसम्मत मार्ग की ओर प्रेरित करें।

पाठ-भेद: विभिन्न मंत्र-संग्रहों और गुरु-परंपराओं में बृहस्पति गायत्री के अन्य रूप भी मिलते हैं। अपनी परंपरा में प्राप्त पाठ को प्राथमिकता देना उचित है।

देवगुरु बृहस्पति ध्यान मंत्र

पूजा अथवा मंत्र-जाप से पहले बृहस्पति देव के तेजस्वी और ज्ञानमय स्वरूप का ध्यान किया जा सकता है।

तेजोमयं शक्तित्रिशूलहस्तं सुरेन्द्रसङ्घस्तुतपादपङ्कजम्।

मेधानिधिं मत्स्यगतं द्विबाहुं गुरुं भजे मानसपङ्कजेऽहम्॥

अर्थ: तेजस्वी, दिव्य आयुध धारण करने वाले, देवताओं द्वारा पूजित और मेधा के भण्डार गुरु बृहस्पति का मैं अपने हृदय-कमल में ध्यान करता हूँ।

बृहस्पति देव के सरल नाम मंत्र

ॐ गुरवे नमः॥

ॐ बृहस्पतये नमः॥

ॐ आङ्गिरसाय नमः॥

ॐ वाचस्पतये नमः॥

ॐ देवगुरवे नमः॥

ॐ ज्ञानप्रदाय नमः॥

अर्थ: इन नाम मंत्रों के माध्यम से बृहस्पति देव के गुरु, आङ्गिरस, वाचस्पति, देवगुरु और ज्ञान प्रदान करने वाले स्वरूपों का स्मरण किया जाता है।

बृहस्पति देव की सरल पूजा विधि

सामान्य घरेलू पूजा में देवगुरु बृहस्पति का ध्यान करके निम्न सरल समर्पण मंत्र बोले जा सकते हैं। सभी सामग्री उपलब्ध होना आवश्यक नहीं है। श्रद्धानुसार दीप, पुष्प और नैवेद्य से भी पूजा की जा सकती है।

ॐ बृहस्पतये नमः आवाहयामि स्थापयामि॥

ॐ बृहस्पतये नमः आसनं समर्पयामि॥

ॐ बृहस्पतये नमः गन्धं समर्पयामि॥

ॐ बृहस्पतये नमः अक्षतान् समर्पयामि॥

ॐ बृहस्पतये नमः पुष्पाणि समर्पयामि॥

ॐ बृहस्पतये नमः धूपमाघ्रापयामि॥

ॐ बृहस्पतये नमः दीपं दर्शयामि॥

ॐ बृहस्पतये नमः नैवेद्यं निवेदयामि॥

ॐ बृहस्पतये नमः नमस्कारान् समर्पयामि॥

भावार्थ: हे देवगुरु बृहस्पति! मैं श्रद्धापूर्वक यह पूजा और सामग्री आपको अर्पित करता हूँ। कृपापूर्वक इसे स्वीकार करें और मुझे ज्ञान एवं सद्बुद्धि प्रदान करें।

कौन-सा बृहस्पति मंत्र जपना चाहिए?

  • सरल दैनिक उपासना: ॐ बृहस्पतये नमः॥
  • सरल मूल मंत्र: ॐ बृं बृहस्पतये नमः॥
  • पौराणिक प्रार्थना: देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्…
  • बुद्धि और धर्म की प्रार्थना: बृहस्पति गायत्री मंत्र।
  • वैदिक उपासना: बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद्…
  • विशेष बीज साधना: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥

सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। सामान्य दैनिक उपासना में “ॐ बृहस्पतये नमः” अथवा “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” में से किसी एक मंत्र का नियमित जाप किया जा सकता है।

बृहस्पति मंत्र जाप का पारंपरिक महत्व

देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, धर्म और उचित मार्गदर्शन के प्रतीक हैं। उनकी उपासना का प्रमुख भाव केवल सांसारिक सफलता माँगना नहीं, बल्कि सही और गलत में अंतर करने की बुद्धि, विनम्रता और सदाचार विकसित करना है।

  • ज्ञान और सद्बुद्धि की प्रार्थना के लिए।
  • गुरु, शिक्षक और ज्ञान के प्रति सम्मान विकसित करने के लिए।
  • अध्ययन और आध्यात्मिक साधना में अनुशासन की प्रेरणा के लिए।
  • जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में विवेक की प्रार्थना के लिए।
  • धर्म, सत्य और नैतिक आचरण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा के लिए।
  • ज्योतिषीय परंपरा में गुरु ग्रह की शांति के लिए की जाने वाली उपासना के एक अंग के रूप में।

ज्योतिष में बृहस्पति को शिक्षा, गुरु, सन्तान, धर्म और जीवन के कई अन्य क्षेत्रों से जोड़ा जाता है, लेकिन किसी एक ग्रह की स्थिति देखकर जीवन की घटनाओं का निश्चित परिणाम नहीं निकालना चाहिए। सम्पूर्ण जन्मकुण्डली का अध्ययन आवश्यक माना जाता है।

बृहस्पति मंत्र जाप में आवश्यक सावधानियाँ

  • मंत्र का उच्चारण यथासंभव स्पष्ट और शांत गति से करें।
  • पुराने page में लिखा “गुरुवे नमः” न रखें; शुद्ध रूप “गुरवे नमः” है।
  • सामान्य भक्तिपूर्ण जाप के लिए 19,000 जाप करना अनिवार्य नहीं है।
  • बीज मंत्र की विशेष साधना, हवन या पुरश्चरण गुरु के मार्गदर्शन में करें।
  • कुंडली में गुरु “कमजोर” होने की सामान्य बात सुनकर भयभीत न हों।
  • मंत्र-जाप से विवाह, नौकरी, धन, सन्तान या परीक्षा में निश्चित सफलता का दावा न करें।
  • ज्योतिषीय उपायों को शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक, वैवाहिक या कानूनी निर्णयों का विकल्प न बनाएँ।
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