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श्री वैद्यनाथ का हार्द शक्तिपीठ

Shri Vaidynath Ka Hard Shaktipith

वैद्यनाथ का हार्द शक्तिपीठ

झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल बैद्यनाथ धाम में भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में नौवां ज्योतिर्लिग है.
यह ज्योतिर्लिंग वैसे तो सभी ज्योतिर्लिगों में सर्वाधिक महिमामंडित माना ही जाता है, लेकिन यह भारत देश का एकमात्र ऐसा स्थल है, जहां ज्योतिर्लिग के साथ शक्तिपीठ भी है. यही कारण है कि इस स्थल को ‘हृदय पीठ’ या ‘हार्द पीठ’ भी कहा जाता है.

यह स्थान चिताभूमि में है। यहाँ सती का हृदय गिरा था। यहाँ की शक्ति ‘जयदुर्गा’ तथा शिव ‘वैद्यनाथ’ हैं।

एक मान्यतानुसार यहीं पर सती का दाह-संस्कार भी हुआ था।

पद्मपुराणानुसार हृदयपीठ के समान महत्त्वपूर्ण शक्तिपीठ पूरे ब्रह्माण्ड में अन्यत्र नहीं है-

“हार्दपीठस्य सदृशे: नाऽस्ति भूगोल मण्डले”।

देवी भागवत में वैद्यनाथ धाम को बागलामुखी का उत्कृष्ट स्थान कहा गया है तथा यहाँ की शक्ति को ‘आरोग्य’ कहा गया है।

मत्स्यपुराण में ‘आरोग्या वैद्यनाये तु’ प्रमाण मिलता है।

शंकराचार्य ने 12 ज्योर्तिर्लिंगों के स्वरूप वर्णन में वैद्यनाथ को शक्तियुक्त कहा है-

पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसंतं गिरिजासमेतम।

सुरासुराराधिपाद पद्मं श्री वैद्यनाथ तमहं नमामि॥

पटना से कोलकाता रेलमार्ग पर स्थित कियूल स्टेशन से 100 कि.मी. दक्षिण वैद्यनाथ धाम (देवगढ़) स्टेशन है।

यहीं सती का हार्द पीठ भी है।

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