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श्री पार्वती माता के मंत्र
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श्री पार्वती माता के मंत्र

Shri Parvati Mata Ke Mantra

माता पार्वती भगवान शिव की अर्धांगिनी और आदिशक्ति का स्वरूप मानी जाती हैं। भक्त उन्हें उमा, गौरी, गिरिजा, शैलजा, भवानी, अम्बिका और महेश्वरी जैसे अनेक नामों से पुकारते हैं। भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण उन्हें जगन्माता और मातृशक्ति के रूप में भी पूजा जाता है।

सनातन परंपरा में माता पार्वती की उपासना भक्ति, आत्मबल, धैर्य, पारिवारिक सद्भाव और दाम्पत्य जीवन के कल्याण की प्रार्थना के लिए की जाती है। हरितालिका तीज, हरियाली तीज, गणगौर, नवरात्रि और गौरी पूजन जैसे अवसरों पर माता पार्वती की विशेष आराधना की जाती है।

इस पृष्ठ पर माता पार्वती के सरल नाम मंत्र, मूल मंत्र, गायत्री मंत्र, स्तुति, शक्ति मंत्र, उमा-महेश्वर मंत्र और कात्यायनी मंत्र अर्थ सहित दिए गए हैं। सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। साधक अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार किसी एक मुख्य मंत्र का नियमित जाप कर सकता है।

माता पार्वती की पूजा और मंत्र जाप की सरल विधि

  • प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ रखें।
  • भगवान श्री गणेश, भगवान शिव और अपने इष्टदेव का स्मरण करके पूजा आरंभ करें।
  • माता पार्वती अथवा शिव-पार्वती के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
  • अपनी श्रद्धानुसार जल, पुष्प, रोली, अक्षत, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
  • विवाहित महिलाएँ अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार माता को सुहाग सामग्री भी अर्पित कर सकती हैं।
  • नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी एक मुख्य मंत्र का चयन करें।
  • सामान्य उपासना में मंत्र का 11, 21 अथवा 108 बार जाप किया जा सकता है।
  • जाप पूर्ण होने के बाद माता पार्वती से भक्ति, सद्बुद्धि, धैर्य और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

ध्यान रखें: माता पार्वती की पूजा किसी भी दिन की जा सकती है। सोमवार, शुक्रवार, शुक्ल पक्ष की तृतीया, तीज, गणगौर और नवरात्रि के अवसरों पर उनकी उपासना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

श्री पार्वती माता के प्रमुख मंत्र

माता पार्वती का सरल नाम मंत्र

यह माता पार्वती का सबसे सरल मंत्र है। दैनिक पूजा, ध्यान अथवा नाम-जप में इसका पाठ किया जा सकता है।

ॐ पार्वत्यै नमः॥

अर्थ: पर्वतराज हिमवान की पुत्री और जगन्माता देवी पार्वती को मैं श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

शिव-पार्वती संयुक्त मंत्र

ऊँ साम्ब शिवाय नमः॥

अर्थ: माता अम्बा अर्थात देवी पार्वती के साथ विराजमान भगवान शिव को मैं श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

माता पार्वती के प्रमुख नाम मंत्र

ॐ गौर्यै नमः॥

ॐ उमायै नमः॥

ॐ गिरिजायै नमः॥

ॐ भवानीदेव्यै नमः॥

ॐ महेश्वर्यै नमः॥

ॐ शैलपुत्र्यै नमः॥

ॐ शिवप्रियायै नमः॥

ॐ जगदम्बिकायै नमः॥

अर्थ: इन नाम मंत्रों के माध्यम से माता पार्वती के गौरी, उमा, गिरिजा, भवानी, महेश्वरी, शैलपुत्री, शिवप्रिया और जगदम्बा स्वरूपों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया जाता है।

माता पार्वती का मूल मंगल मंत्र

यह देवी की प्रसिद्ध नारायणी स्तुति का श्लोक है। इसमें माता को समस्त मंगलों में श्रेष्ठ, सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरण प्रदान करने वाली और त्रिनेत्रधारी गौरी के रूप में प्रणाम किया गया है।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे समस्त मंगलों में परम मंगलमयी, कल्याणस्वरूपा, सभी शुभ उद्देश्यों को सिद्ध करने वाली, शरण प्रदान करने वाली, त्रिनेत्रधारी गौरी और नारायणी देवी! आपको नमस्कार है।

माता पार्वती गायत्री मंत्र

इस प्रचलित गायत्री मंत्र में माता पार्वती को महादेवी और गौरी के रूप में ध्यान करके उनसे बुद्धि को धर्म और शुभ कर्मों की ओर प्रेरित करने की प्रार्थना की जाती है।

ॐ पार्वत्यै विद्महे महादेव्यै धीमहि।

तन्नो गौरी प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम माता पार्वती के दिव्य स्वरूप को जानें और महादेवी का ध्यान करें। देवी गौरी हमारी बुद्धि को धर्म, ज्ञान और शुभ कर्मों की ओर प्रेरित करें।

माता पार्वती का प्रणाम मंत्र

यह देवी माहात्म्य में वर्णित प्रसिद्ध देवी प्रणाम है। इसमें महादेवी को शिवा, प्रकृति और कल्याणमयी भद्रा के रूप में नमन किया गया है।

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।

नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥

अर्थ: देवी और महादेवी को नमस्कार है। कल्याणस्वरूपा शिवा को सदैव नमस्कार है। मूल प्रकृति और मंगलमयी भद्रा देवी के चरणों में हम श्रद्धापूर्वक नतमस्तक हैं।

माता पार्वती का शक्ति मंत्र

इस मंत्र में समस्त प्राणियों में विद्यमान देवी की शक्ति का स्मरण और वन्दन किया जाता है।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन देवी को बार-बार नमस्कार है।

माता पार्वती की ऋषिकृत प्रार्थना

इस प्रार्थना में ऋषिगण माता पार्वती को महादेवी और महान मंगल प्रदान करने वाली देवी के रूप में स्मरण करते हैं।

जय देवि महादेवि महामङ्गलदायिनि।

प्रसीद सीदतां नस्त्वं परित्राणाय पार्वति॥

अर्थ: हे महादेवी और महान मंगल प्रदान करने वाली माता पार्वती! आपकी जय हो। कष्ट में पड़े हम भक्तों पर प्रसन्न होकर हमारी रक्षा कीजिए।

माता पार्वती का कल्याण मंत्र

शिवे शर्वाणि कल्याणि जगदम्ब महेश्वरि।

त्वां नमामि महामाये जगतामम्बिके शिवे॥

अर्थ: हे शिवा, शर्वाणी, कल्याणमयी, जगदम्बा और महेश्वरी! हे महामाया और सम्पूर्ण जगत की माता! मैं आपको श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

उमा-महेश्वर संयुक्त मंत्र

यह मंत्र माता उमा और भगवान महेश्वर की संयुक्त उपासना का सरल मंत्र है। दाम्पत्य जीवन में प्रेम, सम्मान, संयम और पारिवारिक सद्भाव की प्रार्थना करते हुए इसका जाप किया जा सकता है।

ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥

अर्थ: माता उमा और भगवान महेश्वर दोनों को मैं श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ।

शिव-पार्वती परिवार वन्दना

माता मे पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः।

बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्॥

अर्थ: माता पार्वती मेरी माता हैं और भगवान महेश्वर मेरे पिता हैं। शिवभक्त मेरे बन्धु हैं और तीनों लोक ही मेरा अपना देश हैं।

कात्यायनी व्रत मंत्र

कात्यायनी माता को देवी पार्वती और आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार व्रज की कुमारियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने की प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का जाप किया था। विवाह की कामना रखने वाला साधक इसे किसी निश्चित परिणाम की गारंटी न मानकर योग्य, धार्मिक और अनुकूल जीवनसाथी की प्रार्थना के रूप में जप सकता है।

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।

नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥

अर्थ: हे कात्यायनी, महामाया और महान योगशक्ति की अधिष्ठात्री देवी! नन्दगोप के पुत्र श्रीकृष्ण को मेरा पति बनाइए। आपको नमस्कार है।

ध्यान रखें: यह मंत्र श्रीमद्भागवत के विशिष्ट प्रसंग से संबंधित है। इसका पाठ श्रद्धा, सदाचार और ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करने के भाव से करना चाहिए। विवाह संबंधी व्यावहारिक निर्णयों में परिवार, अनुकूलता और उचित विवेक को भी महत्व दें।

पारिवारिक सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना

यह श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड का दोहा है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के समय मुनियों की आज्ञा से भगवान गणेश का पूजन किए जाने का वर्णन है। पारिवारिक जीवन में मंगल, सद्भाव और सुख-शांति की प्रार्थना करते हुए इसका पाठ किया जा सकता है।

मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु-भवानि।

कोउ सुनि संसय करइ जनि सुर अनादि जिय जानि॥

अर्थ: मुनियों की आज्ञा से भगवान शिव और माता पार्वती ने भगवान गणेश का पूजन किया। इसे सुनकर कोई संशय न करे, क्योंकि श्री गणेश अनादि देवता हैं।

योग्य जीवनसाथी और दाम्पत्य सौभाग्य की प्रार्थना

यह माता गौरी की प्रचलित प्रार्थना है। इसमें माता पार्वती से योग्य जीवनसाथी, प्रेमपूर्ण दाम्पत्य और वैवाहिक सौभाग्य प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है।

हे गौरि शङ्करार्धाङ्गि यथा त्वं शङ्करप्रिया।

तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्॥

अर्थ: हे भगवान शंकर की अर्धांगिनी और कल्याणमयी माता गौरी! जिस प्रकार आप भगवान शंकर को प्रिय हैं, उसी प्रकार मुझे भी योग्य जीवनसाथी का प्रेम और सुखमय दाम्पत्य सौभाग्य प्रदान करें।

ध्यान रखें: विवाह संबंधी प्रार्थना को किसी निश्चित व्यक्ति को प्राप्त करने अथवा नियंत्रित करने का माध्यम न मानें। इसका पाठ योग्य, संस्कारी और अनुकूल जीवनसाथी के लिए ईश्वर से प्रार्थना के भाव से करें।

योग्य जीवनसाथी के लिए स्वयंवर पार्वती प्रार्थना

स्वयंवर पार्वती मंत्र का विनियोग

स्वयंवर पार्वती मंत्र का जाप आरंभ करने से पहले यह विनियोग बोला जाता है। यह मुख्य मंत्र नहीं, बल्कि मंत्र के ऋषि, छन्द, देवता और जाप के उद्देश्य का संकल्प है।

ॐ अस्य श्रीस्वयंवरमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः।

देवीगायत्री छन्दः देवी गिरिपुत्री स्वयंवरा देवता।

ममाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः॥

अर्थ: इस श्री स्वयंवर मंत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, इसका छन्द देवी गायत्री है और स्वयंवरा गिरिपुत्री माता पार्वती इसकी अधिष्ठात्री देवी हैं। अपने धर्मसम्मत शुभ मनोरथ की सिद्धि के लिए मैं इस मंत्र का जाप करता हूँ।

स्वयंवरा पार्वती का ध्यान मंत्र

बालार्कायुतसुप्रभां करतले रोलम्बमालाकुलाम्।

मालां सन्दधतीं मनोहरतनुं मन्दस्मितोद्यन्मुखीम्।

मन्दं मन्दमुपेयुषीं वरयितुं शम्भुं जगन्मोहिनीम्।

वन्दे देवमुनीन्द्रवन्दितपदाम् इष्टार्थदां पार्वतीम्॥

अर्थ: उदयकालीन सूर्य के समान प्रकाशमान, हाथों में सुंदर वरमाला धारण किए हुए, मनोहर स्वरूप और मंद मुस्कान से सुशोभित, भगवान शिव का वरण करने के लिए धीरे-धीरे आगे बढ़ती हुई तथा देवताओं और मुनियों द्वारा पूजित माता पार्वती को मैं प्रणाम करता हूँ।

ध्यान रखें: स्वयंवर पार्वती की उपासना को किसी निश्चित व्यक्ति को आकर्षित या नियंत्रित करने का माध्यम न मानें। इसका पाठ योग्य, संस्कारी और अनुकूल जीवनसाथी तथा शुभ दाम्पत्य जीवन की प्रार्थना के भाव से करें। विशेष मंत्र-साधना, न्यास या पुरश्चरण योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना उचित है।

कौन-सा पार्वती मंत्र जपना चाहिए?

  • सरल दैनिक नाम-जप: ॐ पार्वत्यै नमः॥
  • शुभता और कल्याण की प्रार्थना: सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये…
  • बुद्धि और शुभ प्रेरणा की प्रार्थना: पार्वती गायत्री मंत्र।
  • आदिशक्ति के ध्यान के लिए: या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता…
  • कष्ट के समय रक्षा की प्रार्थना: जय देवि महादेवि महामङ्गलदायिनि…
  • पारिवारिक और दाम्पत्य सद्भाव की प्रार्थना: ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥
  • योग्य जीवनसाथी की धार्मिक प्रार्थना: कात्यायनी व्रत मंत्र।

सभी मंत्रों का एक साथ जाप करना आवश्यक नहीं है। सामान्य दैनिक उपासना में “ॐ पार्वत्यै नमः” अथवा “सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये…” में से किसी एक मंत्र का नियमित जाप किया जा सकता है।

माता पार्वती के मंत्र जाप का पारंपरिक महत्व

धार्मिक परंपरा में माता पार्वती तप, भक्ति, धैर्य, शक्ति, मातृत्व और समर्पण की प्रतीक मानी जाती हैं। उनका जीवन साधक को कठिन परिस्थितियों में अपने शुभ संकल्प पर दृढ़ रहने और कर्तव्यों को प्रेम एवं संयम के साथ पूरा करने की प्रेरणा देता है।

  • मन में भक्ति, धैर्य और आत्मबल की प्रार्थना के लिए।
  • पारिवारिक जीवन में प्रेम, सम्मान और सद्भाव की प्रेरणा के लिए।
  • दाम्पत्य जीवन के कल्याण की धार्मिक प्रार्थना के लिए।
  • मातृत्व, करुणा और सेवा की भावना विकसित करने के लिए।
  • मन की चंचलता और नकारात्मक विचारों पर संयम रखने के लिए।
  • कठिन परिस्थितियों में अपने उचित संकल्प पर स्थिर रहने की प्रेरणा के लिए।

मंत्र-जाप का उद्देश्य केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति नहीं, बल्कि अपने विचार, व्यवहार, सम्बन्ध और कर्तव्यों को अधिक सात्त्विक बनाना भी है।

माता पार्वती के मंत्र जाप में सावधानियाँ

  • मंत्र का उच्चारण यथासंभव स्पष्ट और शांत गति से करें।
  • प्रतिदिन मंत्र बदलने के बजाय किसी एक मुख्य मंत्र का नियमित जाप करें।
  • जाप को भय, अंधविश्वास अथवा तत्काल चमत्कार की अपेक्षा से न करें।
  • विवाह या दाम्पत्य जीवन से संबंधित मंत्रों को किसी व्यक्ति को नियंत्रित करने का माध्यम न समझें।
  • किसी विशेष तांत्रिक मंत्र, दीक्षा या बड़े पुरश्चरण के लिए योग्य गुरु का मार्गदर्शन लें।
  • वैवाहिक, पारिवारिक, कानूनी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में केवल मंत्र-जाप पर निर्भर न रहें। आवश्यकता के अनुसार संबंधित विशेषज्ञ की सहायता लें।
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