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श्री मंगल देव जी के मंत्र

श्री मंगल देव जी के मंत्र

ज्योतिष में सभी नौ ग्रह का अपना विशिष्ट महत्व होता है. सभी ग्रह अपनी दशा/अन्तर्दशा में अपने फल प्रदान करने की क्षमता रखते हैं. यदि ग्रह शुभ होकर पीड़ित है तब उन्हें कई प्रकार से बली बनाया जा सकता है और यदि ग्रह कुंडली में अशुभ भाव का स्वामी है तब भी उसका उपचार किया जा सकता है. ग्रह को शुभ अथवा बली बनाने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते है. सबसे आसान, सरल और बिना पैसा खर्च किए काम आने वाला उपाय होता है मंत्र जाप. इसमें आपका थोड़ा सा समय लगता है और फल बहुत अच्छे और शुभ प्राप्त होते हैं| वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को साहस, पराक्रम, ऊर्जा, भूमि, रक्त, अग्नि-तत्व, भाई, आत्मबल और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। मंगल देव को भौम, भूमिपुत्र, अंगारक, कुज और लोहितांग नामों से भी जाना जाता है। परंपरा के अनुसार मंगल ग्रह की शांति, शुभ फल और आत्मबल की वृद्धि के लिए मंगल मंत्रों का जाप किया जाता है।

यदि कुंडली में मंगल कमजोर, पीड़ित या अशुभ फल देने वाला हो, मंगल की दशा या अंतर्दशा चल रही हो, मांगलिक दोष की शांति करनी हो, या जीवन में साहस, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाना हो, तो श्रद्धा और नियम के साथ मंगल मंत्र का जाप किया जा सकता है। मंत्र-जाप को चमत्कार नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और नियमित साधना का मार्ग समझना चाहिए।

मंगल मंत्र जाप की विधि

  • मंगल मंत्र का जाप मंगलवार के दिन प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।
  • सुबह स्नान के बाद या संध्या समय शांत मन से जाप करें।
  • लाल आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके जाप किया जा सकता है।
  • मंगल देव, भगवान हनुमान या अपने इष्टदेव का स्मरण करके मंत्र-जाप शुरू करें।
  • किसी एक मंत्र को चुनकर नियमित रूप से 108 बार जाप करना श्रेष्ठ माना जाता है।
  • जाप के लिए रुद्राक्ष, लाल चंदन या मूंगा की माला का प्रयोग किया जा सकता है।
  • मंगलवार को लाल वस्त्र, मसूर दाल, गुड़, तांबा या लाल पुष्प का दान भी शुभ माना जाता है।

नोट: यदि किसी विशेष ग्रह-दोष, मांगलिक दोष, विवाह बाधा या महादशा के लिए मंत्र-जाप करना हो, तो योग्य ज्योतिषी या गुरु से परामर्श लेकर संकल्प, संख्या और विधि तय करना बेहतर रहता है।

मंगल ग्रह का वैदिक मंत्र

मंगल ग्रह के लिए यह वैदिक मंत्र अत्यंत प्रचलित है। मंगल का संबंध अग्नि, ऊर्जा और पराक्रम से माना जाता है, इसलिए इस मंत्र का जाप मंगल की शक्ति को संतुलित करने के लिए किया जाता है।

ॐ अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्।अपां रेतांसि जिन्वति॥

अर्थ: अग्नि दिव्य लोक का शिखर है, पृथ्वी का पोषक है और जलों के जीवनदायी तत्वों को गति देता है। मंगल अग्नि-तत्व से जुड़ा ग्रह माना जाता है, इसलिए यह मंत्र मंगल की ऊर्जा, साहस और सक्रियता को संतुलित करने के लिए जपा जाता है।

मंगल बीज मंत्र

मंगल बीज मंत्र मंगल ग्रह की शक्ति, साहस, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए जपा जाता है। यह मंगल ग्रह का अत्यंत प्रभावी और प्रचलित मंत्र माना जाता है।

ऊँ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:

कब करें: जब मंगल कमजोर हो, आत्मविश्वास कम हो, कार्यों में साहस और निर्णय क्षमता की कमी हो, या मंगल की दशा-अंतर्दशा चल रही हो, तब इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।

मंगल के तांत्रोक्त मंत्र

मंगल ग्रह की शांति और शुभ प्रभाव के लिए तांत्रोक्त मंत्रों का भी प्रयोग किया जाता है। इनमें से किसी एक मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।

ॐ हूं श्रीं मंगलाय नमः॥

ॐ हां हंसः खं खः॥

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥

ध्यान रखें: तांत्रोक्त मंत्रों का प्रयोग नियम, शुद्ध उच्चारण और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। विशेष अनुष्ठान के लिए गुरु या योग्य विद्वान से मार्गदर्शन लेना उचित है।

मंगल नाम मंत्र

मंगल देव के नामों का स्मरण सरल और प्रभावी माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति लंबा मंत्र नहीं कर पाता, तो इन नाम मंत्रों में से किसी एक का नियमित जाप कर सकता है।

ॐ अं अंगारकाय नमः॥

ॐ भौं भौमाय नमः॥

ॐ मंगलाय नमः॥

अर्थ: अंगारक, भौम और मंगल — ये सभी मंगल देव के नाम हैं। इन मंत्रों में मंगल देव को नमस्कार कर उनसे शुभता, साहस और संतुलित ऊर्जा की प्रार्थना की जाती है।

मंगल का पौराणिक मंत्र

यह मंगल देव का अत्यंत प्रसिद्ध पौराणिक मंत्र है। इसमें मंगल देव को पृथ्वी से उत्पन्न, विद्युत के समान तेजस्वी और शक्ति धारण करने वाला बताया गया है।

ॐ धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।

कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥

अर्थ: जो पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं, जिनका तेज बिजली के समान है, जो कुमार स्वरूप हैं और हाथ में शक्ति धारण करते हैं, ऐसे मंगल देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

मंगल गायत्री मंत्र

मंगल गायत्री मंत्र मंगल देव की कृपा, शुभ ऊर्जा, साहस और सही निर्णय क्षमता के लिए जपा जाता है। मंगल गायत्री के दो प्रचलित रूप मिलते हैं। साधक इनमें से किसी एक मंत्र का जाप कर सकता है।

ॐ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि

तन्नो भौमः प्रचोदयात्॥

ॐ क्षिति-पुत्राय विद्महे लोहिताङ्गाय धीमहि

तन्नो भौमः प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम पृथ्वीपुत्र और अंगारक स्वरूप मंगल देव का ध्यान करते हैं। वे भौम देव हमारी बुद्धि, कर्म और जीवन को शुभ दिशा दें।

मंगल मंत्र जाप के लाभ

परंपरागत ज्योतिष और धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगल मंत्र का नियमित जाप साहस, आत्मबल, निर्णय क्षमता, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक माना जाता है। मंगल की अशुभता, क्रोध, जल्दबाजी, विवाद, भूमि-संबंधी तनाव और वैवाहिक बाधाओं की शांति के लिए भी मंगल मंत्रों का जाप किया जाता है।

मंगल देव की उपासना के साथ भगवान हनुमान की आराधना, हनुमान चालीसा का पाठ, मंगलवार का संयम, दान और सत्कर्म भी शुभ माने जाते हैं।

मंगल मंत्र जाप में सावधानियाँ

  • किसी भी मंत्र का उच्चारण यथासंभव शुद्ध रखें।
  • एक ही मंत्र को चुनकर नियमित रूप से जाप करें। बार-बार मंत्र बदलने से बचें।
  • मंत्र-जाप श्रद्धा, संयम और शांत मन से करें।
  • मंत्र को केवल भय या अंधविश्वास के कारण न करें; इसे साधना और आत्म-संयम का माध्यम समझें।
  • ग्रह-दोष, विवाह, स्वास्थ्य या कानूनी विषयों में केवल मंत्र-जाप पर निर्भर न रहें; आवश्यक होने पर विशेषज्ञ सलाह अवश्य लें।
  • यदि कोई विशेष अनुष्ठान, पुरश्चरण या बड़ी जाप-संख्या करनी हो, तो गुरु या योग्य विद्वान से विधि पूछकर करें।
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