Follow UsInstagram
Please login to save favourites.
श्री बुध देव जी के मंत्र
भाषा :

श्री बुध देव जी के मंत्र

Shri Budh Dev Ji Ke Mantra

वैदिक ज्योतिष परंपरा में सभी नौ ग्रहों का अपना विशेष महत्व माना गया है। बुध ग्रह को नवग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। बुध देव को बुद्धि, वाणी, लेखन, गणना, तर्कशक्ति, संचार, शिक्षा और व्यापार का कारक माना गया है। बुध देव को सौम्य, चन्द्रपुत्र और रोहिणेय नामों से भी जाना जाता है।

जन्मकुंडली में बुध शुभ और बलवान हो तो व्यक्ति की विचार एवं निर्णय क्षमता, संवाद शैली, स्मरण शक्ति और व्यावसायिक समझ को अच्छा माना जाता है। बुध कमजोर, पीड़ित या अशुभ प्रभाव में हो, बुध की दशा या अंतर्दशा चल रही हो अथवा साधक बुद्धि, एकाग्रता और वाणी में संयम की प्रार्थना करना चाहता हो, तो श्रद्धा और नियमितता के साथ बुध मंत्र का जाप किया जा सकता है।

मंत्र-जाप को किसी चमत्कार या निश्चित सांसारिक परिणाम की गारंटी न मानकर आत्म-अनुशासन, एकाग्रता और ईश्वर आराधना का माध्यम समझना चाहिए।

बुध मंत्र जाप की विधि

  • बुध मंत्र का जाप बुधवार से प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।
  • प्रातः स्नान के बाद अथवा संध्या समय किसी स्वच्छ और शांत स्थान पर बैठकरजाप करें।
  • पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके हरे या स्वच्छ आसन पर बैठा जा सकता है।
  • सबसे पहले भगवान श्री गणेश, बुध देव और अपने इष्टदेव का स्मरण करें।
  • अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक बुध मंत्र का चयन करके नियमित रूप से जाप करें।
  • सामान्य उपासना में मंत्र का 11, 21 अथवा 108 बार जाप किया जा सकता है।
  • मंत्र-जाप के लिए तुलसी, स्फटिक अथवा हरे चंदन की माला का प्रयोग किया जा सकता है।
  • बुधवार को हरी मूंग, हरे वस्त्र, हरे फल अथवा विद्यार्थियों के उपयोग कीसामग्री का दान करना भी पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

नोट: किसी विशेष ग्रह-दोष, बुध की महादशा-अंतर्दशा, पुरश्चरण अथवा बड़ी जाप-संख्या के लिए योग्य ज्योतिषाचार्य या गुरु से परामर्श लेकर संकल्प और विधि निर्धारित करना उचित है।

बुध ग्रह का वैदिक मंत्र

यह बुध ग्रह से संबंधित प्रचलित वेदोक्त मंत्र है। इसमें अग्निदेव से जाग्रत होकर मनुष्य को शुभ और लोककल्याणकारी कर्मों से जोड़ने की प्रार्थना की गई है। नवग्रह पूजन की परंपरा में इसका विनियोग बुध ग्रह के मंत्र के रूप में किया जाता है।

ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रतिजागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेथामयं च।

अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सीदत॥

अर्थ: हे अग्निदेव! आप जाग्रत हों और यजमान को भी जाग्रत करें। उसे इष्ट तथा लोककल्याणकारी कर्मों से जोड़ें। इस श्रेष्ठ स्थान पर सभी देवता और यजमान विराजमान हों।

बुध बीज मंत्र

बुध बीज मंत्र बुध देव की उपासना का अत्यंत प्रसिद्ध मंत्र है। परंपरागत रूप से इसका जाप बुद्धि, स्पष्ट वाणी, अध्ययन, तर्कशक्ति और व्यावसायिक समझ के लिए बुध देव से प्रार्थना करते हुए किया जाता है।

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः॥

कब करें: जब बुध ग्रह को जन्मकुंडली में कमजोर या पीड़ित माना गया हो, बुध की दशा-अंतर्दशा चल रही हो अथवा साधक बुद्धि, वाणी और निर्णय क्षमता के लिए बुध देव की उपासना करना चाहता हो, तब इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।

बुध के तांत्रोक्त मंत्र

बुध ग्रह की शांति और बुध देव की कृपा के लिए विभिन्न पूजा-पद्धतियों में तांत्रोक्त मंत्रों का भी प्रयोग किया जाता है। इन मंत्रों में पाठांतर मिल सकते हैं। साधक अपनी परंपरा के अनुसार किसी एक मंत्र का जाप कर सकता है।

ॐ ऐं स्त्रीं श्रीं बुधाय नमः॥

ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नमः॥

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः॥

ध्यान रखें: तांत्रोक्त मंत्रों का उच्चारण सावधानी और नियमपूर्वक करना चाहिए। किसी विशेष तांत्रिक अनुष्ठान या पुरश्चरण के लिए योग्य गुरु का मार्गदर्शन लेना उचित है।

बुध का नाम मंत्र

बुध देव का नाम मंत्र छोटा और सरल है। जो साधक लंबे मंत्रों का उच्चारण नहीं कर पाते, वे इस मंत्र का नियमित जाप कर सकते हैं।

ॐ बुं बुधाय नमः॥

अर्थ: मैं बुद्धि, विवेक और सौम्यता के अधिष्ठाता श्री बुध देव को नमस्कार करता हूँ।

दैनिक उपासना के लिए यह सबसे सरल बुध मंत्र है। विद्यार्थी, लेखक, वक्ता, व्यापारी और सामान्य साधक अपनी श्रद्धा के अनुसार इसका 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं।

बुध का पौराणिक मंत्र

यह बुध देव का प्रसिद्ध पौराणिक एवं प्रणाम मंत्र है। इसमें बुध देव के श्याम वर्ण, अनुपम स्वरूप और सौम्य गुणों का वर्णन किया गया है।

प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम ।

सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम ।।

अर्थ: प्रियंगु की कली के समान श्याम वर्ण वाले, अनुपम स्वरूप और अत्यंत सौम्य गुणों से युक्त श्री बुध देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

बुध गायत्री मंत्र

बुध गायत्री मंत्र का जाप बुद्धि, वाणी, ज्ञान और शुभ प्रेरणा के लिए बुध देव से प्रार्थना करते हुए किया जाता है। बुध गायत्री मंत्र के एक से अधिक प्रचलित पाठ मिलते हैं। साधक इनमें से किसी एक मंत्र का नियमित जाप कर सकता है।

ॐ सौम्यरूपाय विद्महे वाणेशाय धीमहि।

तन्नः सौम्यः प्रचोदयात्॥

ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणीप्रियाय धीमहि।

तन्नो बुधः प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम सौम्य स्वरूप वाले, चन्द्रदेव के पुत्र और वाणी के अधिष्ठाता श्री बुध देव का ध्यान करते हैं। वे हमारी बुद्धि को ज्ञान, विवेक और शुभ कर्मों की ओर प्रेरित करें।

बुध ध्यान मंत्र

मुख्य मंत्र का जाप आरंभ करने से पहले बुध देव के स्वरूप का ध्यान करते हुए इस मंत्र का पाठ किया जा सकता है।

पीताम्बरः पीतवपुः किरीटी चतुर्भुजो दण्डधरश्च हारी।

चर्मासिधृक् सोमसुतो धनुष्मान् सिंहाधिरूढो वरदो बुधश्च॥

अर्थ: पीले वस्त्र धारण करने वाले, मुकुट से सुशोभित, चतुर्भुज, दण्ड, ढाल, तलवार और धनुष धारण करने वाले तथा सिंह पर विराजमान चन्द्रपुत्र बुध देव भक्तों को शुभ वर प्रदान करें।

बुध मंत्र जाप के लाभ

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बुध मंत्र का नियमित जाप बुद्धि, एकाग्रता, स्मरण शक्ति, वाणी, संवाद कौशल और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाने की प्रार्थना के रूप में किया जाता है।

बुध देव को शिक्षा, लेखन, गणना, व्यापार और संचार से संबंधित माना गया है। इसलिए विद्यार्थी, लेखक, वक्ता, शिक्षक, व्यापारी और संचार से जुड़े लोग भी श्रद्धापूर्वक बुध मंत्र का जाप करते हैं।

बुध मंत्र की साधना के साथ अध्ययन, अभ्यास, मधुर वाणी, ईमानदार व्यापार, उचित निर्णय और सात्त्विक आचरण को अपनाना भी आवश्यक है।

बुध मंत्र जाप में सावधानियाँ

  • मंत्र का उच्चारण यथासंभव स्पष्ट और शुद्ध रखें।
  • किसी एक मुख्य मंत्र का चयन करके उसका नियमित जाप करें। बार-बार मंत्रबदलने से बचें।
  • मंत्र-जाप शांत मन, श्रद्धा और संयम के साथ करें।
  • बीज और तांत्रोक्त मंत्रों का उच्चारण बहुत तेज गति या जल्दबाजी में न करें।
  • बुध मंत्र का जाप केवल भय, भ्रम या अंधविश्वास के कारण न करें। इसेआत्म-अनुशासन और आराधना का माध्यम समझें।
  • शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य, मानसिक परेशानी या आर्थिक निर्णयों में केवलमंत्र-जाप पर निर्भर न रहें। आवश्यकता के अनुसार संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • विशेष ग्रह-शांति अनुष्ठान, पुरश्चरण अथवा हजारों मंत्रों का संकल्पयोग्य गुरु या आचार्य के मार्गदर्शन में ही करें।
Please login to save favourites.