जय जय चामुण्डा चण्ड-मुण्ड सँहारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय महिषासुर के मान भंग कर डाले
जय शुम्भ-निशुम्भ से बड़े निशाचर मारे
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय मधु-कैटभ और रक्त बीज संहारे
जय धूम्रकेतु से पापी दुष्ट पठारे
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
तेरा यह सारा विश्व ऋणी है भारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय जय चामुण्डा चण्ड-मुण्ड सँहारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
इस जग में ज्योति राज रही माँ तेरी
मंदिर में प्रतिमा साज रही माँ तेरी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
घर घर में जय जय गूंज रही माँ तेरी
मन मन में मुरलिया बाज रही माँ तेरी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
तेरा गुण गाते माँ हर्ष हर्ष नर नारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
तेरा जो करता श्रद्धा से नित दर्शन
तेरा जो करता भक्ति भाव से पूजन
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
नतमस्तक हो कर करता जो अर्चन
छंट जाते उसके जन्म जन्म के बंधन
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
यह अनुभव कह लिख गए लोग हितकारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
यह सुन करके माँ तेरी शरण में आया
और भक्ति भाव से पुष्प बूट कर लाया
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
निर्धन के अंगीकार करो यह माया
इससे अच्छा उपहार न घर में पाया
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
पलवारी दे सब ढूंढे अठा अठारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी
जय जय चामुण्डा चण्ड-मुण्ड सँहारी
जय जय चामुण्डा भक्त जनन भय हारी


