मांगलिक दोष पूजा विधि
जब कुण्डली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल होता है तो उसे मांगलिक दोष कहा जाता है । जिन लोगों को मंगल दोष होता है उनके विवाह में बहुत सी परेशानियां आती हैं । ऐसी मान्यता है कि मंगल दोष जिनकी कुण्डली में हो उन्हें मंगली जीवन साथी ही तलाश करनी चाहिए ।
ऐसे बहुत से उपाय है जिसके द्वारा मंगल दोष को दूर किया जा सकता है । मंगल को शांत करने के लिए मांगलिक दोष पूजा अनुष्ठान करवाना बहुत प्रभावी माना जाता है ।अग्नि पुराण में वर्णित है कि यदि पूरे विधि -विधान के साथ यह अनुष्ठान किया जाए तो मंगल का दुष्प्रभाव समाप्त हो जाता है ।
मांगलिक दोष पूजा विधि
मान्यता है कि अगर कुंडली में मांगलिक दोष बेहद प्रभावी हो और जातक की शादी में काफी समस्याएं आ रही हों तो ही मांगलिक दोष निवारण पूजा करनी चाहिए । अन्य स्थितियों में सामान्य पूजा द्वारा हल निकालने का प्रयास करना चाहिए ।
मांगलिक दोष के निवारण के लिए करीब 7 से 10 दिन तक पूजा की जाती है । इसके पहले दिन करीब 7 पंडित शिवजी के समक्ष जातक के लिए 125,000 बार मंगल वेद मंत्र जाप करने का संकल्प लेते हैं । इसके बाद शिव पूजा कर अनुष्ठान का आरंभ करते हैं । पूजा के आरंभ में सभी पंडितों का नाम और गोत्र बोला जाता है और मंगल दोष समाप्त होने की कामना करते हैं ।
इसके बाद सभी पंडित जातक के लिए मंगल वेद मंत्र अर्थात मांगलिक दोष निवारण मंत्र का जाप करना शुरू कर देते हैं । प्रत्येक पंडित इस मंत्र को आठ से दस घंटे तक जपता है ताकि निश्चित समय सीमा में 125,000 बार मंत्रों का जाप पूर्ण हो सके ।
इसके बाद शिव परिवार की पूजा की जाती है । जिसके बाद पंडितों द्वारा जाप पूरा होने का संकल्प लिया जाता है जिसका फल वह जातक को देते हैं । पूजा की समाप्ति पर हवन करके जातक को कुंड के 3, 7 या 5 चक्कर लगाना चाहिए । तत्पश्चात पंडितों का आशीर्वाद लेना चाहिए और ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए ।
ग्रहों के अनुसार ही करें वस्तुओं का दान
शास्त्रों के अनुसार मांगलिक दोष पूजा के बाद जातक को नवग्रहों से संबंधित विशेष वस्तुएं दान करनी चाहिए । यह हर जातक से लिए अलग- अलग होता है । शास्त्रों के अनुसार सामान्यता चावल, गुड़, चीनी, नमक, गेहूं, दाल, तेल, तिल, जौ तथा कंबल आदि दान किया जाता है ।

